हिंदी को नष्ट कर रही अंग्रेजी की मिलावट
Author Prabhat khabar digital desk
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विशेष : हिंदी भाषा के प्रति लोगों में आत्मीय लगाव होना जरूरी : डॉ मैनेजर पांडेय पंचदेवरी : हिंदी के साथ अंग्रेजी को मिलाने का मतलब है हिंदी को नष्ट करना. हिंदी एक समृद्ध भाषा है. अंग्रेजी की मिलावट कर हिंदी का अपमान किया जा रहा है. उक्त बातें देश के हिंदी के प्रख्यात समालोचक […]
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विशेष : हिंदी भाषा के प्रति लोगों में आत्मीय लगाव होना जरूरी : डॉ मैनेजर पांडेय
पंचदेवरी : हिंदी के साथ अंग्रेजी को मिलाने का मतलब है हिंदी को नष्ट करना. हिंदी एक समृद्ध भाषा है. अंग्रेजी की मिलावट कर हिंदी का अपमान किया जा रहा है. उक्त बातें देश के हिंदी के प्रख्यात समालोचक सह जेएनयू के हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ मैनेजर पांडेय ने
हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में प्रभात खबर से बातचीत के दौरान कही.उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ अंग्रेजी की मिलावट बेहद खतरनाक है.
इससे हिंदी काफी प्रभावित हो रही है. मिलावट के कारण हिंदी सरल एवं सुगम होने के बजाय कठिन होती जा रही है. विद्वानों को चाहिए कि वे हिंदी के साथ किसी भी अन्य भाषा को न मिलाएं. हिंदी के साथ सिर्फ उन बोलियों की मिलावट की जाये,जो इस भाषा से जुड़ी हुई हों. इससे हिंदी में काफी सरलता आयेगी और यह भाषा काफी आकर्षक भी होगी. हिंदी और संस्कृत की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ विद्वान हिंदी से संस्कृत को जोड़ते हैं. यह कहीं से हिंदी के पक्ष में नहीं है.
इससे हिंदी और कठिन हो जाती है. सब लोग समझ नहीं पाते हैं जिसका सीधा असर हिंदी के समृद्धीकरण एवं विकास पर पड़ता है. हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यहां शिक्षा का माध्यम हिंदी ही होनी चाहिए. यह भारी भ्रम है कि अंग्रेजी पढ़ कर ही बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.
जहां की मातृभाषा हिंदी है, वहां शिक्षा के माध्यम के लिए इससे बेहतर भाषा कोई हो ही नहीं सकती. आज पूरी दुनिया के शिक्षाविद एवं विशेषज्ञ यह मानते हैं कि हर क्षेत्र में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा ही होनी चाहिए. साथ ही उन्हें कठिनाई भी महसूस नहीं होती है. लेकिन, जब किसी भाषा में अन्य भाषाओं की मिलावट कर दी जाती है, तो वह भाषा कठिन हो जाती है और उसका महत्व कम हो जाता है.
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