Viral Video : चींटियों को कमजोर समझना इस सांप को पड़ा भारी, दुर्दशा देख डर जाएंगे आप
Published by : Rajneesh anand Updated At : 05 Sep 2025 12:50 PM
Viral Video : चींटियों को कमजोर समझना इस सांप को पड़ा भारी, दुर्दशा देख डर जाएंगे आप
Viral Video : अपने से कमजोर को कम आंकना बड़ी गलती है, यह बात एक बार फिर साबित हुई है. इस वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कैसे चींटियों के ग्रुप ने एक सांप पर हमला कर उसे खत्म कर दिया. चींटियों की यह खासियत है कि वे ग्रुप में रहती हैं.
Viral Video : नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है. मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है. आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती. इस प्रेरणादाई कविता में जिस खूबसूरती से चींटियों के जज्बे का वर्णन किया गया है, वो जज्बा इस वीडियो में बखूबी नजर आता है. एक सांप जब चींटियों के इलाके में घुस जाता है, तब चींटियां उससे डरने की बजाय उसपर ऐसा हमला करता है कि सांप की दस पीढ़ियां याद रखेंगी.
चींटियों ने झुंड में किया सांप पर हमला
सांप अक्सर चींटियों को अपना आहार बना लेते हैं, हालांकि सभी सांप चींटियों को नहीं खाते हैं. वायरल वीडियो में जो सांप नजर आ रहा है वह चींटियों को अपना आहार बनाने के उद्देश्य से ही उनके इलाके में घुसा है. सांप ने शायद यह सोचा था कि वह बहुत मजबूत है और चीटिंया कमजोर, लेकिन प्रकृति हमें यह सिखाती है कि कमजोर से कमजोर प्राणी को भी कम नहीं आंकना चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं तो पछताना पड़ सकता है जिस तरह इस सांप को पछताना पड़ा है. वायरल वीडियो में यह साफ दिख रहा है कि जब सांप चींटियों के इलाके में पहुंचता है, तो उसपर एक-दो नहीं बल्कि चीटिंयों का पूरा समूह हमला कर देता है. सांप के शरीर पर सिर्फ चींटियां ही चींटियां दिखती है और अंतत: सांप को हार मान पड़ती है. चींटियों के इस हमले में सांप की मौत हो जाती है.
कमजोर को कम आंकना बड़ी भूल है
यह वीडियो बहुत प्रेरणादाई है और सभी प्राणियों को यह सबक देती है कि अपने से कमजोर को कम आंकना बड़ी भूल होगी. इस वीडियो को एक्स पर वेरिफाइड एकाउंट Nature is Amazing ने पोस्ट किया है. यह एकाउंट प्रकृति से जुड़े वीडियो को पोस्ट करने में एक्सपर्ट है, इसलिए इस वीडियो को झूठा या एआई क्रिएटेड ना समझें. यह सच है. कई शोध इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि चींटियां सामूहिक रूप से डंक मारकर सांपों की हत्या कर सकती हैं.
सांप से नफरत करने वालों को भी आ गई दया
इस वीडियो पर जो कमेंट आ रहे हैं उसमें से अधिकतर में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि यह वीडियो असली है या एआई क्रिएटेड. सबको यह लग रहा है कि चींटियां कैसे सांप को मार सकती है. कुछ लोगों ने चींटियों की बहादुरी के कुछ और वीडियो भी पोस्ट किए हैं. वहीं कुछ लोगों को सांप की स्थिति पर बहुत दया आ रही है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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