शहबाज कलंदर दरगाह : प्रत्येक आतंकी हमले के बाद पाक कसता है कमर, पर क्यों नहीं होता कामयाब?

Updated at : 18 Feb 2017 12:47 PM (IST)
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शहबाज कलंदर दरगाह : प्रत्येक आतंकी हमले के बाद पाक कसता है कमर, पर क्यों नहीं होता कामयाब?

जब भी पाकिस्तान में आतंकी हमले होते हैं, पाकिस्तान पूरी सक्रियता से आतंकियों का सफाया करने में जुट जाता है. इस बार शहबाज कलंदर दरगाहपर हुएआतंकीहमले के 24 घंटे के अंदर पाक सुरक्षाकर्मियों ने 100 आतंकियों को मार गिराया. यह पहली दफा नहीं है जब पाकिस्तान ने त्वरित प्रतिक्रिया दिखायी है. इससे पहले भीआतंकीहमले के […]

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जब भी पाकिस्तान में आतंकी हमले होते हैं, पाकिस्तान पूरी सक्रियता से आतंकियों का सफाया करने में जुट जाता है. इस बार शहबाज कलंदर दरगाहपर हुएआतंकीहमले के 24 घंटे के अंदर पाक सुरक्षाकर्मियों ने 100 आतंकियों को मार गिराया. यह पहली दफा नहीं है जब पाकिस्तान ने त्वरित प्रतिक्रिया दिखायी है. इससे पहले भीआतंकीहमले के बाद पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी ने अभियान चलाया है, लेकिन लंबे समय तक चले इस अभियान के बावजूद पाकिस्तान की जमीं पर पसरी आतंकी गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा.

16 दिसंबर 2014 को पेशावर में सेना के एक स्कूल पर हमले में 150बच्चे व अन्यमारे गए थे. मृतकों में ज्यादातर बच्चे थे. यह एक तरह से दिल दहलाने वाली घटना थी सेना ने बड़े पैमाने पर आतंक निरोधी अभियान चलाया. इस हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने आतंकियों को सफाया करने के लिए नेशनल एक्शन प्लान का निर्माण किया.इसके तहतआतंकियों के स्पीडी ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट का निर्माण,नेशनल काउंटर टेरेरिज्म को फिर से पुनर्गठन और आतंकी संगठनों के कम्यूनिकेशन सिस्टम को ध्वस्त करने का फैसला लिया गया था.पाकिस्तान के इस एक्शन प्लान के तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गयी लेकिन एक साल बाद फिर पाकिस्तान में आतंकियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया. भारत विरोधी गतिविधियां पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के लिए ऑक्सीजन का काम करती है.
पेशावर हमले के बादकई आतंकियों को फांसी की सजा भी दी गयी. इस दौरान राहील शरीफ पाकिस्तान के आर्मी चीफ थे. पाकिस्तान में राहील शरीफ की छवि एक सख्त आर्मी चीफ की बनी, सऊदी के नेतृत्व में आतंकवाद से लड़ाई के लिए 39 इस्लामिक देशों के सेना का एक संगठन बना. इस संगठन का चीफ राहील शरीफ को बनाया गया लेकिन तमाम किस्म केअंतरराष्ट्रीय सहयोग और सैन्य ऑपरेशन के बावजूद पाकिस्तान में आत्मघाती हमलों की संख्या में कमी नहीं आ रही है. बल्कि यह बेहताशा बढ़ती जा रही है.
भारत, अफगानिस्तान विरोधी चरमपंथी गुटों पर कार्रवाई नहीं करता है पाकिस्तान
पाकिस्तान में पिछले तीन दशक में कई आतंकवादी संगठनों ने अपनी मजबूत जमीन तैयार कर ली है. ये संगठन देशभर में कई मदरसों का संचालन व धर्मार्थ कार्य करते हैं. लिहाजा सरकार भी राजनीतिक कारणों से इन्हें नहीं छूती है. हाल ही में मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को नजरबंद किया गया. पाक सरकार ने अमेरिका के दबाव में महज दिखावे के लिए कार्रवाई की. पाकिस्तान सेना भारत विरोधी
गतिविधि के लिए लंबे समय तक इन आतंकी संगठनों का मदद लेती रही है. आतंकी सगठन पाकिस्तानी समाज व आर्मी से इस कदर घुले -मिले हैं कि उन्हें अलग करना आसान काम नहीं है.
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