भारत में आयोजित ''द हार्ट ऑफ एशिया'' सम्मेलन में भाग लेगा पाकिस्तान

Updated at : 25 Oct 2016 12:23 AM (IST)
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भारत में आयोजित ''द हार्ट ऑफ एशिया'' सम्मेलन में भाग लेगा पाकिस्तान

इस्लामाबाद : पाकिस्तान उरी हमले के बाद देश को अलग-थलग करने के भारत सरकार के प्रयासों के प्रभाव को कम करने के लक्ष्य के साथ अफगानिस्तान को लेकर भारत में होने वाले एक प्रमुख सम्मेलन में हिस्सा ले सकता है. पंजाब के अमृतसर में दिसंबर के पहले सप्ताह में ‘द हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल’ मंत्रिस्तरीय बैठक […]

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान उरी हमले के बाद देश को अलग-थलग करने के भारत सरकार के प्रयासों के प्रभाव को कम करने के लक्ष्य के साथ अफगानिस्तान को लेकर भारत में होने वाले एक प्रमुख सम्मेलन में हिस्सा ले सकता है. पंजाब के अमृतसर में दिसंबर के पहले सप्ताह में ‘द हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल’ मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन होना है. पाकिस्तान में नवंबर में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन का भारत द्वारा बहिष्कार किए जाने और दोनों देशों के बीच के मौजूदा तनाव को देखते हुए पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर संशय की स्थिति थी.

पाकिस्तान की ओर से जारी सीमा पार आतंकवाद का हवाला देते हुए भारत ने घोषणा की थी कि ‘मौजूदा परिस्थितियों’ में वह इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले दक्षेस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले पाएगा. ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के मुताबिक इस बारे में जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल सम्मेलन से दूर रहकर पाकिस्तान का भारत के अनुकरण का कोई इरादा नहीं है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘‘संबंधित पक्षों का विचार है कि पाकिस्तान को हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल सम्मेलन में हिस्सा लेना चाहिए.

” अधिकारी ने बताया कि सम्मेलन के अफगानिस्तान से जुड़े होने के कारण इसके बहिष्कार का सवाल हीं नहीं पैदा होता. उन्होंने बताया, ‘‘हम लोगों ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान हर उस पहल का समर्थन करता है, जिसका सरोकार अफगानिस्तान की शांति और स्थिरता से है.” हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पाकिस्तान इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को भेजेगा या किसी कनिष्ठ अधिकारी को.

अंतिम अधिकारी ने बताया कि बैठक में पाकिस्तान के हिस्सा लेने से दुनिया भर में यह स्पष्ट संदेश जायेगा कि भारत से इतर वह अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की स्थापना के लिए अपने पडोसियों से संपर्क करने के पक्ष में है. अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति और युद्ध प्रभावित देश में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता की बहाली के लिए उठाये जाने वाले तात्कालिक संभावित कदमों पर चर्चा के लिए रुस, चीन और तुर्की समेत 14 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के एकदिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने की संभावना है.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित होने वाली बैठक में अमेरिका समेत 17 समर्थक देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे. अफगानिस्तान और तुर्की की पहल पर वर्ष 2011 में ‘द हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रोसेस’ की स्थापना हुई थी. पाकिस्तान ने पिछले वर्ष दिसंबर में आयोजित मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हिस्सा लिया था. उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष के अफगान स्थानीय सम्मेलन से पाकिस्तान और भारत को अपनी स्थगित शांति प्रक्रिया को शुरू करने में मदद मिली थी। ऐसा सम्मेलन के इतर अजीज और सुषमा की मुलाकात के कारण संभव हो सका था.

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