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BREXIT : बाहरी लोगों की संख्या बढ़ना बना ब्रेक्जिट का बड़ा कारण, VIDEO में देखें क्या कहते हैं ब्रिटिश

Updated at : 23 Jun 2016 1:51 PM (IST)
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BREXIT :  बाहरी लोगों की संख्या बढ़ना बना ब्रेक्जिट का बड़ा कारण, VIDEO में देखें क्या कहते हैं ब्रिटिश

इंटरनेट डेस्क आज ब्रिटेन में एक नया इतिहास बनने वाला है. उसे तय करना है कि वह यूरोपीय यूनियन में बना रहेगा या उसे छोड़ देगा. इसके लिए आज गुरुवार को ब्रिटेन के स्थानीय समय के अनुसार, सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है, जो रात 10 बजे तक चलेगा. 4.65 करोड़ ब्रिटिश […]

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इंटरनेट डेस्क

आज ब्रिटेन में एक नया इतिहास बनने वाला है. उसे तय करना है कि वह यूरोपीय यूनियन में बना रहेगा या उसे छोड़ देगा. इसके लिए आज गुरुवार को ब्रिटेन के स्थानीय समय के अनुसार, सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है, जो रात 10 बजे तक चलेगा. 4.65 करोड़ ब्रिटिश वोटर इसमें भाग लेंगे, जो ब्रिटेन में अबतक हुए किसी भी प्रकार के चुनाव के लिए एक रिकार्ड है. पर, ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर जाने के अभियान से जुड़ा एक बड़ा सवाल यह है कि क्या ब्रिटेन प्रवासियों की बढ़ती संख्या से बेचैन हैं, क्या ब्रिटेनको यह लग रहा है कि उसके यहां प्रवासियों की संख्या बढ़ने से उनके लिए रोजगार व वेतन के अवसर सीमित हो जाते हैं? क्या ब्रिटेन बढ़ते मुसलिम प्रवासियों व आतंकवाद को लेकर भी चिंतित है, जिस देश ने कुछ माह पूर्व अपने देश की मुसलिम महिलाओं को अंगरेजी सीखाने व स्थानीय ब्रिटिश आबादी से हेल-मेल बढ़ाने का बड़ा अभियान शुरू किया?

भारत सहित दुनिया भर के देशों, निवेशकों की नजर इस फैसले परटिकी है. औपचारिक रिजल्ट का एलान भले शुक्रवार को होगा. जनमत संग्रह का सीधा सवाल है कि क्या यूनाइटेड किंगडम को यूरोपीय यूनियन में बने रहना चाहिए या यूरोपीय यूनियन को छोड़ देना चाहिए? ब्रिटिश मीडिया को चुनाव के दौरान सीमित कवरेज की ही अनुमति है, हालांकि वे मतदान के बाद उसे लाइव कवर कर सकेंगे.


क्या है प्रवासियों की स्थिति, क्या होगा उनके साथ?

ब्रिटेन में प्रवासियों की संख्या एक बड़ा मुद्दा है. यूरोपीय यूनियन से अगर ब्रिटेन अलग होगा तो भी दूसरे देशों के नागरिक ब्रिटेन में बने रहेंगे, हालांकि ऐसी सूरत में नये आने वाले अप्रवासियों पर ब्रिटेन सख्ती करेगा. 2014 के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन केदूसरेदेशों के करीबतीनमिलियन अप्रवासीब्रिटेनमें थे, जबकि ब्रिटेन के 1.2 मिलियन लोग यूरोपीय यूनियन के दूसरे देशों में रहते हैं. यानी ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन के लोगों के लिए एक आकर्षक ठिकाना है. 2015 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में 270, 000 यूरोपीय यूनियनके लोग रहने पहुंचे, जबकि यूरोपीय यूनियन के दूसरे देशों में 85,000 ब्रिटिश रहने गये. यानी ब्रिटेन पर 185, 000 प्रवासियों का बोझ पड़ा है. यह अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

दूसरी बात कि ब्रिटेन गैर यूरोपीय का भी पसंदीदा जगह है. पिछले साल ही 2, 77, 000 गैर यूरोपीय नागरिक ब्रिटेन में रहने को आये.यूरोपीय यूनियन से अलग होने का अभियान चलाने वाले नेताओं काकहना है किइयूकीउदारनीतियों के कारण ब्रिटेन को मुसलिम शरणार्थियों का सामना करना पड़ रहा है. लगभग छह करोड़ की आबादी वाले ब्रिटेन में 30 लाख आबादी मुसलिमों की है, जिसमें आधे ब्रिटेन में पैदा नहीं हुए हैं. ये आंकड़े यूके नेशनल स्टेटिस्टिक्स के हैं.

स्लोवाकिया के पीएम रॉबर्ट फित्सो मुसलिम शरणार्थियों की संख्या बढ़ने के खिलाफ हैं. वहीं, जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल उदार. जर्मनी ने अबतक दस लाख शरणार्थियों को शरण दिया है. ब्रिटेन के किसी अन्य देश ने एेसी उदारता नहीं दिखायी.

यूरोपीय यूनियन के देशों का नौकरियों मेें प्रतिशत भी अधिक है. ब्रिटेन में जहां यूरोपीय यूनियन के 78 प्रतिशत लोग कार्यशील हैं, वहीं ब्रिटेन के 74 प्रतिशत व दूसरे देशों के 62 प्रतिशत लोग ही कार्यशील हैं.

कुछ शोध में यह कहा गया है अप्रवासन मजदूरी पर बेहद मामूली असर डालता है. यह मध्यम और उच्च वेतन पर काम करने वालों को लाभ पहुंचाता है, जबकि कम वेतन पर काम करने वालों को नुकसान पहुंचाना है. ब्रिटेन में रोजगार भी एक मुद्दा है. ध्यान रहे कि ब्रिटेन से हाल में टाटा के बाहर निकलने की खबर पर हाल में पूरी ब्रिटिश सरकार सक्रिय हो गयी थी, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होने वाले थे.

बैंक ऑफ इंग्लैंड के एक शोध में भी कहा गया है कि कम पारिश्रमिक वाले रोजगार में प्रवासियों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ने से इंग्लैंड में जन्म लेने वाले लोगों की मजदूरी दो प्रतिशत कम हो जाती है. ब्रिटेन के हेल्थ सेक्टर में भी यूरोपीय यूनियन के लोगों का प्रतिशत बढ़ा है. ये सब ऐसे मुद्दे हैं, जो बेचैनी उत्पन्न करने का कारण हैं.

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