विवाह के लिए अपने बच्चों की पसंद जाने बिना आगे न बढ़ें
Updated at : 08 Jun 2016 8:37 AM (IST)
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वीना श्रीवास्तव साहित्यकार व स्तंभकार, इ-मेल : veena.rajshiv@gmail.com, फॉलो करें – फेसबुक : facebook.com/veenaparenting ट्विटर : @14veena आज मैं दोबारा उस मेल की चर्चा कर रही हूं, जिसमें तीन बहन और भाई की शादी का जिक्र था कि कैसे तीनों बहनों को आर्थिक तंगी के चलते किसी भी तरह से घर से विदा किया गया. […]
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वीना श्रीवास्तव
साहित्यकार व स्तंभकार, इ-मेल : veena.rajshiv@gmail.com, फॉलो करें –
फेसबुक : facebook.com/veenaparenting
ट्विटर : @14veena
आज मैं दोबारा उस मेल की चर्चा कर रही हूं, जिसमें तीन बहन और भाई की शादी का जिक्र था कि कैसे तीनों बहनों को आर्थिक तंगी के चलते किसी भी तरह से घर से विदा किया गया. उसकी बातें शेयर कीं, तो उसने धन्यवाद लिखा और जो कुछ अपना दर्द साझा किया वह आप भी जानिए. आपको हैरत होगी और दुख भी. खासकर यह उन लोगों के लिए है, जो इस बात को बुरा नहीं मानते कि अगर बेटी गरीब घर से है और उसके घरवाले किसी अमीरजादे या किसी विकलांग के साथ विवाह कर दें, तो इसमें कोई बुरी बात नहीं. वे गरीबी और तंगी से मुक्त होकर खुशी से रहती हैं और उनका यह भी कहना है कि जो विकलांग हैं या सुंदर नहीं हैं, क्या उनको जीने का, खुश होने का हक नहीं ?
पहले मेल की दुखद बातें. उस महिला ने लिखा है कि जब उसका विवाह हुआ वह 25 बरस की थी और उसका पति उससे दोगुना बड़ा यानी 50 साल का. 26 वर्ष की तो उसकी बड़ी बेटी थी. दस वर्षों बाद अब वह लड़की 35 की है और वह साठ बरस का. केवल बेटे की ख्वाहिश में यह विवाह हुआ. उसने लिखा है “क्या मेरी उम्र खत्म हो गयी ? मेरा जीवन कैसे गुजरेगा ?
वह 65 वर्ष के हैं और मैं तो अभी 35 की हूं और इस विवाह के लिए भी मेरे पिता को उन्होंने 40 हजार रुपये दिये. यानी मुझे बेच दिया. आप खुद सोचिए कैसे एक पिता ने सोच लिया कि उसकी बेटी हमेशा खुश रहेगी. अगर रुपयों से खुशी खरीदी जा सकती तो हर अमीर खुश होता, वह तो हमेशा धन से जीवन खरीदना जानता है”.
बात यहीं पर खत्म नहीं होती, आगे लिखा है- “बीच वाली बहन की जिससे शादी हुई उसने तलाक नहीं लिया था, जिसकी वजह से उसकी शादी ही गैर कानूनी है. उसकी पहली पत्नी घर वापस आ गयी है. मेरी बहन का क्या होगा ? सबसे दुखद बात सुनिए. छोटी बहन के पति उसे कहीं ले नहीं जा सकते, क्योंकि वह चल ही नहीं पाते. उसकी मैरिड लाइफ नहीं है. आप समझ रही है ना, मैं क्या कहना चाह रही हूं ? अब बताइए कैसे काटेगी वह अपना जीवन ? क्या उसकी कोई इच्छा नहीं होगी ? अगर कोई गलत कदम उठा ले, तो कौन जिम्मेदार होगा. मुझे पता है सारा दोष उस बेचारी पर ही मढ़ा जायेगा.
मैंने आपको केवल इसलिए लिखा कि जो हमें जानते हैं, हमारे रिश्तेदार हैं, उनसे कुछ कहूंगी तो हम तमाशा ही बनेंगे मगर जो आपका लेख पढ़ेंगे शायद कुछ समझ सकें, क्योंकि दूसरों की गलतियों से लोग सीख लेते हैं”. हमारा समाज आज भी बहुत दकियानूसी है. लोग बदल रहे हैं मगर भ्रष्टाचार, धोखा और रुपया इतना अहम हो गया कि उसके आगे संबंध गौण हो गये हैं.
मित्रो, इस दुनिया में सबको जीने का हक है. अच्छी सूरत वाले हमेशा अच्छे हों, यह जरूरी नहीं और बुरी सूरतवाले दिल से भी बुरे हों, यह भी जरूरी नहीं. हर वह इनसान खूबसूरत है, जिसमें इंसानियत के गुण हैं. जो बड़ों का सम्मान करे. रिश्तों की एहमियत को जाने, भावनाओं को समझे, जरूरतमंद की सहायता के लिए तत्पर रहे. घर-परिवार को जोड़कर रखे, जो किसी भूखे को देखकर अपनी एक रोटी में से कम-से-कम आधी तो उसे दे दे.
महिलाओं की इज्जत करे. जिसके दिल में सभी प्राणियों के लिए स्नेह हो. महज अपने फायदे के लिए दूसरों का अहित न करे. हर उस व्यक्ति का सम्मान करे, जो मेहनत करके दो जून की रोटी सम्मान के साथ खाता हो. शारीरिक सौंदर्य से किसी के भी आंतरिक सौंदर्य को नहीं आंका जा सकता. इसलिए विवाह के समय आप बच्चों यानी लड़की और लड़के के गुणों के बारे में पता करें. उसका स्वभाव कैसा है, वह घर में किस तरह रहते हैं ? उनके घर का माहौल कैसा है ? वैसे भी ‘रूप’ तो आज है कल नहीं रहेगा. यह शरीर समय के साथ खत्म होना ही है, मगर ‘गुणों में गुणात्मक वृद्धि’ होती है जो किसी भी परिवार के फलने-फूलने के लिए बहुत जरूरी है. भारतीय समाज में विवाह पवित्र बंधन है.
जो जल्दी नहीं टूटता और लोग इसे हर तरह से बचाने का प्रयास करते हैं. मगर बच्चों को बेचना किसी भी सूरत से उचित नहीं. मैंने एक विवाह ऐसा भी देखा जिसमें लड़कीं की आंखों की रोशनी नहीं थी मगर उसने इसको अपनी कमी नहीं बनने दिया. वह अपने काम खुद करती थी. अच्छी सिंगर थी. इस बात से प्रभावित एक युवक उसे दिल दे बैठा और शादी के लिए घरवालों से बात की.
उस पर भी लड़की ने कहा कि वह नहीं चाहती कि उसे अंधी समझकर कोई उस पर एहसान करे. तब उस युवक ने कहा कि इसी आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के कारण ही वह उससे प्यार करता है. फिर दोनों की शादी हो गयी. मगर बच्चों की मरजी के खिलाफ, उनकी पसंद पूछे बिना केवल यह देखना कि धनवान घर का है और यह सोचना कि विकलांग है, तो क्या हुआ, शादी करना ठीक नहीं. कहीं ऐसा न हो कि उन बेटियों की तरह आपकी बेटी भी अपनी इच्छाओं का गला घोंटकर जिये, तो क्या फायदा ऐसे विवाह का?
इससे अच्छा है कि वह कुछ काम करे और अपना जीवन गुजारे. किसी से रुपये लेकर लड़कियों को बेचना गैर कानूनी तो है ही, इनसानियत के खिलाफ भी है. दहेज लेना और देना भी गैर कानूनी है. पसंद का जीवनसाथी हो, तो अभावों में भी जीवन बसर हो सकता है, मगर जो मन से दुखी रहे वह जीवन भर भला कैसे खुश रह सकता है?
क्रमश:
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