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एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत, न्यूजीलैंड के साझा हित : प्रणब मुखर्जी

Updated at : 02 May 2016 4:58 PM (IST)
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एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत, न्यूजीलैंड के साझा हित : प्रणब मुखर्जी

आकलैंड : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक शांतिपूर्ण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड का ‘साझा हित’ बताते हुए कहा कि भारत न्यूजीलैंड के साथ संबंधों के विस्तार की भरपूर गुंजाइश देखता है और दोनों देश इस क्षेत्र में सुरक्षाव स्थिरता को प्रोत्साहन देने के लिए साझीदार के तौर पर सफलतापूर्वक काम कर सकते हैं. […]

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आकलैंड : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक शांतिपूर्ण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड का ‘साझा हित’ बताते हुए कहा कि भारत न्यूजीलैंड के साथ संबंधों के विस्तार की भरपूर गुंजाइश देखता है और दोनों देश इस क्षेत्र में सुरक्षाव स्थिरता को प्रोत्साहन देने के लिए साझीदार के तौर पर सफलतापूर्वक काम कर सकते हैं.

यहां एक विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि यह समय दोनों देशों के लिए अपने संबंधों का विस्तार करने का है क्योंकि भारत एक ‘आशावाद एवं आर्थिक सफलता की तस्वीर’ पेश करता है. उन्होंने कहा, हमारी अर्थव्यवस्था विश्व में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जिसकी अनुमानित वृद्धि दर 2015-16 में 7.6 प्रतिशत है. विश्व बैंक का अनुमान है कि यह अगले दो वर्षों में बढ़कर 7.8 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत पहुंच जाएगी.

उन्होंने कहा कि हमारी आर्थिक वृद्धि में न्यूजीलैंड की भागीदारी के लिए जबरदस्त संभावनाएं हैं. यहां आकलैंड काॅलेज आफ टेक्नोलाजी में विद्यार्थियों और फैकल्टी को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम उन कई क्षेत्रों में से एक हैं जहां भारत ने निवेश के प्रवाह को प्रोत्साहन देने के लिए नियमनों को उदार किया है और जहां भारत विदेशी भागीदारी का स्वागत करता है.

मुखर्जी ने जोर देकर कहा कि एक शांतिपूर्ण, सहकारिता के भाव वाले समृद्ध एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड के ‘साझा हित’ हैं. उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि यह एक भारी अवसरों वाला क्षेत्र है जहां हम सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को प्रोत्साहन देने के लिए साझीदार के तौर पर काम कर सकते हैं. भारत संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य बहुपक्षीय मंचों पर न्यूजीलैंड के साथ अपने सहयोग को महत्व देता है.

राष्ट्रपति ने कहा, दक्षिण प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों को खुला रखने में और विभिन्न क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विदेश नीति की स्थितियों के सम्मिलन में हमारा साझा हित है. मुखर्जी ने एक विस्तृत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड द्वारा समर्थन दिए जाने की भी सराहना की.

उन्होंने कहा, वर्तमान समय में, संयुक्त राष्ट्र के गठन के सात दशकों के बाद दोनों राष्ट्र 21वीं सदी की एक बदली हुई दुनिया में संयुक्त राष्ट्र को प्रासंगिक और प्रभावी बनाने के लिए इसके ढांचे में तत्काल सुधार की जरुरत पर एकमत हैं. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनावों में न्यूजीलैंड की तगड़ी सिफारिश इस बात का प्रमाण है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका कितना अधिक सम्मान किया जाता है.

मुखर्जी ने कहा, प्रशांत महासागर के द्विपीय देशों की ओर से आप एक बुलंद आवाज हैं और प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर वैश्विक वार्ताओं को आकार देने में आप एक प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं.

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