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जापान के भूकंप पीडितों तक पहुंचने के लिए भूस्खलनों से जूझ रहे बचावकर्मी

Updated at : 17 Apr 2016 12:47 PM (IST)
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जापान के भूकंप पीडितों तक पहुंचने के लिए भूस्खलनों से जूझ रहे बचावकर्मी

माशिकी (जापान) : देश में आए दो बडे भूकंपों के बाद अब भी फंसे लोगों तक पहुंच बनाने के क्रम में जापानी बचावकर्मी और अधिक भूस्खलनों की आशंकाओं से जूझ रहे हैं. इसी दौरान अमेरिकी सेना बचावकार्यों में जापानी बचावकर्मियों की मदद के लिए तैयार है. इस दोहरी आपदा में कम से कम 41 लोग […]

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माशिकी (जापान) : देश में आए दो बडे भूकंपों के बाद अब भी फंसे लोगों तक पहुंच बनाने के क्रम में जापानी बचावकर्मी और अधिक भूस्खलनों की आशंकाओं से जूझ रहे हैं. इसी दौरान अमेरिकी सेना बचावकार्यों में जापानी बचावकर्मियों की मदद के लिए तैयार है. इस दोहरी आपदा में कम से कम 41 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग आठ लोग अब भी लापता हैं. ऐसी आशंका है कि लापता लोग ढह चुके मकानों या खिसकी हुई मिट्टी के ढेरों के नीचे दबे हो सकते हैं. कुमामोतो के आसपास के इलाके में रातभर बारिश होती रही। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में भूकंप के बाद ढीली पडी पहाडियों के खिसकने का खतरा है क्योंकि भूकंप के बाद वाले झटके जारी हैं.

गुरुवार को आए शुरुआती भूकंप और उसके बाद कल आए उससे भी अधिक शक्तिशाली भूकंप सेे बचने वाले लोगों के लिए मौसम एक अलग मुसीबत लेकर आया है. हजारों लोगों ने अस्थायी निवास पर रात गुजारी. बुरी तरह प्रभावित हुए माशिकी शहर में लकडी से बने कुछ पारंपरिक मकान अक्षुण्ण रहे और इनके निवासियों ने इस तबाही के बीच जीने की मुश्किलों को बयां किया. सेइया ताकामोरी (52) ने नीले रंग की प्लास्टिक की चादर से बने एक शरणस्थल की ओर इशारा करते हुए एएफपी को बताया, ‘‘मैं कार में सोता हूं और दिन के समय इस तंबू में रहता हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘हम सब जानते थे कि इस क्षेत्र में माशिकी शहर के नीचे एक सक्रिय भूगर्भीय हलचल चल रही थी लेकिन किसी ने इसकी परवाह नहीं की. हम हमेशा एक दूसरे से कहते थे कि एक और बडा भूकंप इसी स्थान पर आएगा लेकिन इस बात को गंभीरता से लेते नहीं थे.”

पडोसी मैसेनोरी मासुदा :59: ने कहा कि पहले भूकंप के बाद कई मकान ठीकठाक आकार में थे लेकिन दूसरा भूकंप आने पर वे बुरी तरह प्रभावित हुए। इसकी वजह से इन मकानों में रहने वाले लोग मूलभूत जरुरत की चीजों से भी वंचित हो गए. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मेरा मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए बैटरी चाहिए, मुझे शौचालय की जरुरत है. मैं टूटे-फूटे मकान में अंदर जाने से डर रहा हूं लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं है. मैं पानी की एक बाल्टी अपने साथ ले जाता हूं और मुझे मकान के अंदर बना शौचालय इस्तेमाल करना है.” दो भूकंपों के कारण कई भूस्खलन हुए हैं, जिसके कारण मकान, सडकें और रेलवे लाइनें ढह गईं। भूकंपों के कारण आधुनिक इमारतों को भी नुकसान हुआ.

90 हजार से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका है. इनमें से 300 लोग एक बांध के पास के क्षेत्र के निवासी हैं. इस बांध के ढह जाने की आशंका है. भूस्खलनों और सडकों के नुकसान के कारण पर्वतीय इलाकों के सुदूर गांव पूरी तरह से कट चुके हैं. ऐसा माना जा रहा है कि एक गांव में कम से कम 500 लोग फंसे हैं, जिनतक सिर्फ हेलीकॉप्टर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है. सरकार ने कल कहा कि ‘‘ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां लोग जिंदा दबे हुए हैं.” खबरों का कहना है कि दर्जनों लोग लापता हैं लेकिन यह संख्या आज सुबह तक काफी कम हो गई थी.

प्रधानमंत्री शिंझो आबे ने कहा कि लगभग 25 हजार सैनिकों, दमकल कर्मियों, चिकित्साकर्मियों और अन्य बचावकर्मियों के साथ अमेरिकी सेना के सदस्य बचाव कार्य में जुड जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे रक्षामंत्री ने मुझे बताया है कि अमेरिकी सेना ने कहा है कि हवाई मार्ग का यातायात उपलब्ध है. हम इस प्रस्ताव के लिए आभारी हैं. अमेरिका ने जापान मंे लगभग 50 हजार पुरुष एवं महिला जवानों को तैनात किया है.”

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