मिथिलांचल में बोले सुमो : लालू हैं मैथिल विरोधी

दरभंगा से विनोद गिरि दरभंगा : अंतिम चरण के चुनाव के लिए दरभंगा पहुंचे पूर्वउप मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता सुशील मोदीनेकहा है कि एनडीए के पक्ष में तूफान जैसी स्थिति है. हर चरण के चुनाव में दो तिहाई बहुमत एनडीए के पक्ष में रहा है. अंतिम चरण के चुनाव में भी वोटरों ने मन बना […]
दरभंगा से विनोद गिरि
दरभंगा : अंतिम चरण के चुनाव के लिए दरभंगा पहुंचे पूर्वउप मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता सुशील मोदीनेकहा है कि एनडीए के पक्ष में तूफान जैसी स्थिति है. हर चरण के चुनाव में दो तिहाई बहुमत एनडीए के पक्ष में रहा है. अंतिम चरण के चुनाव में भी वोटरों ने मन बना लिया है. 57 सीटों का जो चुनाव हो रहा है, उसमें भी एनडीए को दो तिहाई बहुमत मिलेगा. वे मंगलवार की सुबह शहर के एक होटल में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. श्री मोदी ने कहा लालू जी को मैथिली से सख्त नफरत है. बीपीएससी की परीक्षा से उन्होंने मैथिली भाषा को हटाया. इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट तक गये कि मैथिली को बीपीएससी से दूर रखा जाये. जबकि भाजपा ने 2006 में मैथिली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर इस क्षेत्र को गौरव प्रदान किया. उन्होंने कहा कि मैथिली किसी एक जाति की भाषा नहीं है. यह मिथिलांचल के सभी जात धर्म के लोगों की भाषा है.
सुमो ने कहा कि टिकट वितरण में भी हमने सभी वर्गों को उनका पूरा हक देने का काम किया है. लालू प्रसाद ने एक भी भूमिहार को टिकट नहीं दिया, जबकि मात्र एक मैथिल ब्राहृमण को टिकट दिया. हमने 18 ब्राहृमणों को टिकट दिया है. जिसमें 7 मैथिल हैं. जबकि यूपीए ने मात्र 8 को दिया. जिसमें मात्र तीन मैथिल हैं. अतिपिछड़ा वर्ग को सम्मान देते हुए इस समाज को 31 टिकट दिया, जिसमें अकेले बीजेपी से 25 इस समाज के लोग चुनाव लड़ रहे हैं. जिसकी आबादी 35 प्रतिशत है. जबकि महागंठबंध ने मात्र 22टिकटही इस समाजको दिया. उन्होंने कहा कि सहनी समाज को भी हमने उचित मान सम्मान देने का काम किया. तेली जाति से एनडीए ने 8 लोगों को टिकट दिया, जिसमें 7 सिर्फ बीजेपी से हैं. जबकि यूपीए ने एक भी तेली जाति को टिकट नहीं दिया है.
कानू समाज से भी तीन को हमने टिकट दिया जबकि यूपीए ने पूरी तरह निराश किया. अल्पसंख्यक समाज से 10 को टिकट देने की बात भी कही. वहीं यादव समाज से 22 लोगों को बीजेपी से उम्मीदवार बनाया गया. श्री मोदी ने कहा कि शुरू से ही उन्होंने विकास को मुद्दा बनाया. पर नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद विकास के मुद्दे से भागते रहे. लालू प्रसाद के पास 25 साल शासन करने के बाद भी बताने के लिए कुछ भी नहीं है. यही वजह है कि एक बार भी उन्होंने विकास शब्द का उच्चारण तक करना मुनासिब नही समझा.
नीतीश कुमार भी विकास की चर्चा नहीं कर सकते. सात साल एनडीए की सरकार रही. ढाई साल उनकी सरकार रही जिसमें उनकी कोई उपलब्धि नहीं है. पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांचल एवं कोसी के साथ भी लालू प्रसाद एवं नीतीश कुमार ने नाइंसाफी करने का काम किया है. कोसी में आयी बाढ आपदा में मुख्यमंत्री राहत कोष में मिली 217 करोड़ की राशि आज भी पड़ी हुई है. मुख्यमंत्रत्री को यह बताना चाहिए कि आखिर वह राशि क्यों नही खर्च कर सके. मौके पर भाजपा नेता अर्जुन सहनी, प्रत्याशी संजय सरावगी समेत कई भाजपा नेता मौजूद थे.
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