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बिहार चुनाव : तीसरे फेज में मल्लाह वोट पर सबकी नजर

Updated at : 20 Oct 2015 3:26 PM (IST)
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बिहार चुनाव : तीसरे फेज में मल्लाह वोट पर सबकी नजर

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में जाति का गणित काफी उलझा हुआ है. हर राजनीतिक दल क्षेत्रवार वहां के प्रभावी जातीय समुदाय को खुद से जोड़ना चाहता है. अब तीसरे चरण के चुनाव में जिस जातीय समुदाय की सर्वाधिक चर्चा है, वह है मल्लाह समाज. मुजफ्फरपुर जिले में 11 विधानसभा सीटें पड़ती हैं और हर […]

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पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में जाति का गणित काफी उलझा हुआ है. हर राजनीतिक दल क्षेत्रवार वहां के प्रभावी जातीय समुदाय को खुद से जोड़ना चाहता है. अब तीसरे चरण के चुनाव में जिस जातीय समुदाय की सर्वाधिक चर्चा है, वह है मल्लाह समाज. मुजफ्फरपुर जिले में 11 विधानसभा सीटें पड़ती हैं और हर सीट पर मल्लाहों का कुछ न कुछ असर है. लेकिन, मीनापुर, गायघाट, कांटी, पारू जैसी सीटों पर वे निर्णायक हैं.

मुकेश सहनी फैक्टर

मुकेश सहनी मल्लाह समाज के युवा नेता हैं. कैप्टन जयनारायण निषाद के बाद वे समाज के लोगों विशेष कर युवाओं को आकर्षित करने वाले अहम चेहरे बने. इस साल 25 जून को उन्होंने मल्लाह समाज की मुजफ्फरपुर के एमआइटी मैदान में एक विशाल रैली की थी, जिसमें काफी भीड़ जुटी थी. वहीं, उसी दिन मुजफ्फरपुर के ही चक्कर मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी रैली हुई थी, जिसमें भी काफी भीड़ थी. बिहार चुनाव अभियान के शुरुआती दौर में मुकेश सहनी ने महागंठबंधन के नेता नीतीश कुमार को समर्थन दिया, लेकिन बाद में उन्हाेंने स्टैंड बदल लिया और भाजपा के प्रति अपना समर्थन जताया. उन्होंने रैलियों में अमित शाह के साथ मंच भी साझा किया.
उनके इस स्टैंड से संशय की स्थिति बनी. हालांकि भाजपा को यह विश्वास है कि मुकेश सहनी अपने समाज का वोट उन्हें दिलवायेंगे. वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 19 अक्तूबर को मुकेश सहनी के संगठन निषाद मंच के कई लोगों को जदयू में सदस्यता दिलायी. जदयू का यह प्रयास समाज के वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश का कवायद का हिस्सा है. हालांकि नीतीश कुमार ने चुनाव के पहले ही मल्लाह समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देकर एक बड़ी राजनीतिक चाल चल दी, जिसकी काट भाजपा मुकेश सहनी के चेहरे में ढूंढने की कोशिश करती नजर आ रही है.


कैप्टन जयनारायण निषाद फैक्टर

कैप्टन साहब के बेटे अजय निषाद मुजफ्फरपुर से सांसद हैं. कैप्टन साहब भी एनडीए के लिए वोट मांग रहे हैं. एनडीए के जो भी प्रत्याशीउनसेआग्रह करते हैं, वे उनके लिए क्षेत्रमें जाते हैं और उनका प्रभावहै,लेकिननीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग वकामकाज उनकी अपील के लिए अब सीमाएं भी तय करती हैं. बोचहा सीट पर लोजपा प्रत्याशी बेबी कुमार को बदलकर वहां से रामविलास पासवान द्वारा अपने बागी हो रहे दामाद अनिल साधु को टिकट दिये जाने के बाद हालात बदल गये हैं. कैप्टन साहब बेबी के लिए वोट मांगने की बात कह रहे हैं, जबकि अनिल साधु ने आज कह दिया है कि अगर भाजपा वालों ने उनका साथ नहीं दिया तो हम भी उन्हें सबक सिखायेंगे. ऐसे में कैप्टन साहब के सामने भी धर्मसंकट उत्पन्न हो गया है.

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