चीन में बनी गोलियां दोयम दर्जे की: रिपोर्ट

Updated at : 08 Aug 2015 8:59 PM (IST)
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चीन में बनी गोलियां दोयम दर्जे की: रिपोर्ट

बीजिंग: एक सैन्य शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अब तक ऐसी गोलियां इस्तेमाल कर रहा है जो करीब 30 साल पहले विकसित की गयी थीं और यह विदेशों में बनी गोलियों की तुलना में दोयम दर्जे की है. चीन सेना ने एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि चीनी गोलियों ने […]

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बीजिंग: एक सैन्य शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अब तक ऐसी गोलियां इस्तेमाल कर रहा है जो करीब 30 साल पहले विकसित की गयी थीं और यह विदेशों में बनी गोलियों की तुलना में दोयम दर्जे की है. चीन सेना ने एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि चीनी गोलियों ने कई मायने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है लेकिन उनमें सुधार की जरुरत है.

पीएलए नेशनल डिफेंस यूनीवर्सिटी के याओ जिकियान और ली वेई द्वारा लिखी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि 5.8 एमएम की मानक गोली का इस्तेमाल सिर्फ चीन मुख्य गोली के रुप में करता है. नाटो के 5.56 एमएम और रुस के 5.45 एमएम की गोलियों की तुलना में चीन की 5.8 एमएम गोली की विशेषता इसकी उच्च शुरुआती वेग, लंबी सीधी रेंज और जोरदार तरीके से भेदना है जो बाहरी प्रभाव के प्रति इसके उच्च प्रतिरोध को सुनिश्चित करता है.

हालांकि, उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि चीनी गोलियां विदेशी गोलियों की तुलना में चार मायनों में कमतर है, बुलेट टाइप पूर्ण नहीं है. कार्य निष्पादन अच्छा नहीं है, गन प्रोपोलेंट का सामान खराब निष्पादन वाला है और नये प्रकार की गोलियों की शोध एवं विकास क्षमता अपर्याप्त है.

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