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भारतीय मूल के डॉक्टर को 18 माह की कैद

Updated at : 27 May 2015 10:06 AM (IST)
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भारतीय मूल के डॉक्टर को 18 माह की कैद

न्यू यार्क: चिकित्सा सेवा में धांधली के आरोप में अमेरिका की एक अदालत ने 43 वर्षीय भारतीय मूल के एक डॉक्टर को 18 माह की कैद की सजा सुनाई गई है. इतना ही नहीं रिहाई के तीन साल बाद तक उसपर निगरानी रखी जाएगी. इसके अलावा क्षतिपूर्ति के रूप में डॉक्टर को संघीय अधिकारियों को […]

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न्यू यार्क: चिकित्सा सेवा में धांधली के आरोप में अमेरिका की एक अदालत ने 43 वर्षीय भारतीय मूल के एक डॉक्टर को 18 माह की कैद की सजा सुनाई गई है. इतना ही नहीं रिहाई के तीन साल बाद तक उसपर निगरानी रखी जाएगी. इसके अलावा क्षतिपूर्ति के रूप में डॉक्टर को संघीय अधिकारियों को 84 हजार डॉलर से ज्यादा की राशि देने के आदेश दिए गये हैं.

न्यू यार्क में दर्द प्रबंधन केंद्र को संचालित करने वाले 43 वर्षीय महेश कुथुरु को अमेरिकी जिला अदालत के न्यायाधीश डेविड हर्ड ने स्वास्थ्य सेवा में धांधली के लिए 18 माह की और नियंत्रित पदार्थों के अवैध वितरण पर अन्य 12 माह की सजा सुनाई. हालांकि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी. जनवरी में कुथुरु को मेडीकेयर एवं स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अन्य लाभ कार्यक्रमों के संबंध में धांधली वाली योजना चलाने के आरोपों का दोषी पाया गया था. इस संदर्भ में यह दावा पेश किया गया कि प्रतिवादी ने एक मरीज को चिकित्सीय सेवाएं दी थीं. जबकि, वास्तव में उसने खुद या किसी अन्य चिकित्सक ने या उसके निर्देशन में काम करने वाले किसी लाइसेंसधारी गैर चिकित्सक ने ऐसी कोई चिकित्सीय सेवाएं नहीं दी थीं.

कुथुरु ने नियंत्रित पदार्थों के वितरण का आरोप भी स्वीकार कर लिया. अभियोजन के अनुसार, कुथुरु और एक अन्य सह-प्रतिवादी बोनी मीस्लिन मेडीकेयर के संबंध में धांधली करने वाली एक ऐसी योजना में संलिप्त थे, जिसमें भुगतान के लिए फर्जी दावे किए जाते थे. इन दावों में दिखाया जाता था कि डॉक्टर ने किसी मरीज को चिकित्सीय सेवाएं दी हैं जबकि वास्तव में उसने ये सेवाएं नहीं दी होती थीं.

नवंबर 2008 में कुथुरु ने लॉस वेगास में एक चिकित्सा केंद्र खरीदा था. जनवरी 2010 से कम से कम सितंबर 2011 तक कुथुरु अपना अधिकतर समय लास वेगास वाले केंद्र में बिताता था और न्यू यार्क में मरीजों का इलाज करने कभी कभार ही आता था. यह वह अवधि थी, जब न्यू यार्क वाले केंद्र में मरीजों की देखभाल करने के लिए ऐसे लोग लगाए गये थे, जिनके पास न तो लाइसेंस था और न ही कोई औपचारिक चिकित्सीय प्रशिक्षण.

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