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समलैंगिक सहपाठी की जासूसी : भारतीय की दोषसिद्धि संबंधी फैसला हो सकता है रद्द

Updated at : 01 Apr 2015 10:39 AM (IST)
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समलैंगिक सहपाठी की जासूसी : भारतीय की दोषसिद्धि संबंधी फैसला हो सकता है रद्द

न्यूयार्क : न्यूजर्सी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण किसी को डराने-धमकाने संबंधी राज्य के कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया है जिसके मद्देनजर अब इस संबंध में उस भारतीय मूल के पूर्व छात्र की दोषसिद्धि का फैसला रद्द हो सकता है जो अपने समलैंगिक सहपाठी की जासूसी के मामले में दोषी […]

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न्यूयार्क : न्यूजर्सी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण किसी को डराने-धमकाने संबंधी राज्य के कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया है जिसके मद्देनजर अब इस संबंध में उस भारतीय मूल के पूर्व छात्र की दोषसिद्धि का फैसला रद्द हो सकता है जो अपने समलैंगिक सहपाठी की जासूसी के मामले में दोषी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण किसी को डराने-धमकाने संबंधी राज्य के कानून के कुछ हिस्से को पिछले सप्ताह रद्द कर दिया. भारतीय मूल के छात्र धारण रवि के वकील ने कहा कि टेलर क्लीमेंटी वेबकैम मामले में रवि के खिलाफ दोबारा सुनवाई हो सकती है. कोर्ट ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया कि 2001 में बना कानून ‘असंवैधानिक रूप से अस्पष्ट’ है.

उसने पीडित की मानसिक स्थिति पर केंद्रित कानून के तीसरे संभाग को रद्द कर दिया. उसने कहा कि पीडित की नहीं बल्कि प्रतिवादी की मंशा और मानसिक स्थिति महत्वपूर्ण है. एनजे डॉट कॉम पर एक रिपोर्ट में रवि के वकील स्टीवन आल्टमैन के हवाले से कहा गया है कि यह फैसला एक मामले में रवि की दोषसिद्धि को प्रत्यक्ष रूप से निरस्त कर देता है जो उस संभाग पर आधारित है.

पूर्वाग्रह के कारण किसी को डराने धमकाने संबंधी आरोपों समेत कई आरोपों में रवि को 2012 में दोषी ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई अब भी जारी है.सुप्रीम कोर्ट का फैसला रवि के मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश सुपीरियर कोर्ट जज ग्लेन बर्मन के निर्णय पर भी सवाल खडा करता है.

अब सेवानिवृत्त हो चुके जज बर्मन ने अभियोजन पक्ष को क्लीमेंटी की मानसिक स्थिति संबंधी सबूत पेश करने की अनुमति दी थी. उन्होंने आल्टमैन को सुनवाई के दौरान इस संबंध में सबूत पेश करने की इजाजत नहीं दी थी कि क्लीमेंटी उसकी समलैंगिकता को लेकर अपनी मां की अस्वीकृति और जीवन में अन्य घटनाओं से दु:खी था.

आल्टमैन ने कहा कि बर्मन ने उन्हें सुसाइड नोट समेत क्लीमेंटी के पास से और उसके कम्प्यूटर से मिला कुछ सामान भी प्राप्त नहीं करने दिया. रवि को इस मामले में 30 दिन के कारावास की सजा सुनायी गयी थी. इसके अलावा रिहाई के बाद तीन वर्ष तक उस पर नजर रखने को कहा गया था.

उसे 300 घंटे की सामुदायिक सेवा करने और करीब 11000 डॉलर जुर्माना भरने की भी सजा दी गई थी. उसे 20 दिनों बाद जेल से रिहा कर दिया गया था. क्लीमेंटी ने वेबकैम से जासूसी के कुछ दिन बाद आत्महत्या कर ली थी.

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