ओबामा ने कहा, ''हारेगा IS समूह''

वाशिंगटन : राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि वह पश्चिम एशिया में युद्धरत इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे. इसके साथ ही ओबामा ने संकल्प जताया है कि आईएस समूह हारने जा रहा है.’ बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इराक और अफगानिस्तान को ध्यान में रखते […]
वाशिंगटन : राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि वह पश्चिम एशिया में युद्धरत इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे. इसके साथ ही ओबामा ने संकल्प जताया है कि आईएस समूह हारने जा रहा है.’ बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इराक और अफगानिस्तान को ध्यान में रखते हुए बडे स्तर पर अमेरिका के जमीनी स्तर के बडे युद्धक अभियानों की संभावना को खारिज कर दिया.
ओबामा ने कल व्हाइट हाउस में कहा, ‘मेरा मानना है कि अमेरिका को वापस जमीनी स्तर पर एक और लंबे युद्ध में नहीं उलझना चाहिए.’ उनके आश्वासन के बावजूद कांग्रेस में जो शुरुआती प्रतिक्रिया हुई, वह द्विपक्षीय संशय के समान थी. रिपब्लिकन सदस्यों ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि उन्होंने जमीनी स्तर पर युद्ध करने वाले बलों के लिए किसी भी दीर्घकालीन प्रतिबद्धता को नहीं चुना जबकि कुछ डेमोक्रेट सदस्यों ने कहा कि उन्होंने उनकी तैनाती कर देने के द्वार खोल दिए हैं.
एक प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मैक्केन ने भी कहा कि ओबामा ने अमेरिका से प्रशिक्षण प्राप्त उन विद्रोहियों के लिए किसी भी तरह के सहयोग को खारिज कर दिया है, जो सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद से लड रहे हैं. ‘यह अनैतिक है.’ ओबामा के प्रस्ताव के अनुसार, इस्लामिक स्टेट के लडाकों के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल की मंजूरी तीन साल तक के लिए होगी और इसपर राष्ट्रीय सीमाओं की कोई बाधा नहीं होगी.
इस लडाई को इस्लामिक स्टेट संगठन की किसी भी ‘करीबी इकाई’ तक विस्तार दिया जा सकेगा. इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया है और वहां शरियत कानून को कडे रूप में लागू कर दिया है. वह बंधक बनाए गए कई लोगों को मौत के घाट उतार चुका है, जिनमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं.
अमेरिका की अपनी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले समूह के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ओबामा ने कहा, ‘कोई गलती मत करें. यह एक मुश्किल अभियान है.’ उन्होंने कहा कि आतंकियों को परास्त करने में समय लगेगा, खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में. ‘लेकिन हमारा गठबंधन आक्रामक मुद्रा में है. आईएसआईएल बचाव की मुद्रा में आ गया है और आईएसआईएल हारने वाला है.’
व्हाइट हाउस के इस प्रस्ताव के जरिए वर्ष 2002 में अमेरिकी नेतृत्व में इराक में घुसने की कांग्रेसी अनुमति प्रभावहीन हो जाएगी. यह एक ऐसा कदम है. इससे रिपब्लिकन नाखुश हैं. लेकिन 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद कांग्रेस ने जो अलग अनुमति जारी की थी, वह प्रभाव में बनी रहेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




