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अपने आसपास से भी सीख सकते हैं हम

Updated at : 07 Dec 2014 11:34 PM (IST)
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अपने आसपास से भी सीख सकते हैं हम

।। दक्षा वैदकर ।। ब्रिटेन के एक शहर में एक मां ने मरते समय अपने छह साल के बेटे से कहा, मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं तुझे पढ़ा न सकी और अब तो मेरे पास ज्यादा समय भी नहीं है. मैं तेरे लिए कुछ नहीं कर सकती. यह समझ ले कि अब […]

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।। दक्षा वैदकर ।।
ब्रिटेन के एक शहर में एक मां ने मरते समय अपने छह साल के बेटे से कहा, मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं तुझे पढ़ा न सकी और अब तो मेरे पास ज्यादा समय भी नहीं है. मैं तेरे लिए कुछ नहीं कर सकती. यह समझ ले कि अब तेरे लिए सारा संसार ही पाठशाला है. तुझे जहां से जो मिल सके, वहां से सीखना. वही तेरे काम आयेगा. उसी से तुझे रोशनी मिलेगी.
यह कह कर मां ने हमेशा के लिए आंखें मूंद ली. बेटा देखता रह गया. अपने भीतर उमड़ रहे आंसुओं को उसने रोका. उसने मां की सीख गांठ बांध ली. अपने दादाजी को पत्थर तोड़ते देख वह पत्थर तोड़ने का काम करने लगा. इस संबंध में जब उसका ज्ञान एक खास स्तर तक पहुंच गया, तो वह गोताखोरी करने लगा और उसने समुद्री चट्टानों के बारे में पर्याप्त जानकारी हासिल कर ली. इसके बाद उसने संगतराश के घर नौकरी कर ली और पत्थर के गुणों का अध्ययन करने लगा. धीरे-धीरे लाल पत्थर के बारे में उसका ज्ञान एक ऊंचाई तक पहुंच गया. वह उसका विशेषज्ञ माना जाने लगा. तब उसने अपने अनुभवों को लिखना शुरू किया.
रात-दिन एक कर लिखता रहा. वह अपने अनुभव लोगों से बांटने लगा. उसकी बातें सुन लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे. धीरे-धीरे उसकी ख्याति फैलने लगी. पहले देश में फिर उसके बाहर भी उसे लोग जानने लगे. वह समूचे विश्व में चर्चित हो गया. यह बालक और कोई नहीं ह्यू मिलर था, जो अपनी मां की सीख के कारण विश्व प्रसिद्ध भूगर्भशास्त्री बना. उसने साबित किया कि किताबी ज्ञान से कहीं ज्यादा महत्वपपूर्ण है जीवन के अनुभवों से अजिर्त ज्ञान.
हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं,जो आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई पूरी नहीं कर सके या उनका दिमाग इतना तेज नहीं है कि वे परीक्षा में पास हो जाते. हो सकता है कि हम खुद ही वह इंसान हों. ऐसे समय में हमें निराश होने की जरूरत नहीं है. डिग्री एक हद तक मायने रखती है.
अगर हम चाहें, तो बिना किताबों के जीवन से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं. बस हमें जो भी काम करना है, वह मन लगा कर करना है.अगर आपके बच्चे भी पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं, तो उनमें ऐसी हॉबी डेवलप करें, जिसमें वे रुचि लें और उसमें एक्सपर्ट हो जाएं.
बात पते की..
– कई बच्चों का दिमाग पढ़ाई में नहीं चलता है, लेकिन चित्रकारी अच्छी करते हैं, क्रिकेट अच्छा खेलते हैं. ऐसे बच्चों को उनकी रुचि का काम करने दें.
– हर इनसान किताबों से ही ज्ञान ले, यह जरूरी नहीं है. कई बार किताबों से ज्यादा ज्ञान लोगों को जीवन की प्रयोगशाला में मिल जाता है.
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