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भारत को बातचीत रद्द नहीं करनी चाहिए थी: शरीफ

Updated at : 28 Nov 2014 1:34 PM (IST)
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भारत को बातचीत रद्द नहीं करनी चाहिए थी: शरीफ

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि भारत को विदेश सचिव स्तर की वार्ताओं को रद्द नहीं करना चाहिए था. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत से वार्ता से पहले कश्मीरी नेताओं से बातचीत करने में कुछ भी नया नहीं था. 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन से पाकिस्तान […]

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि भारत को विदेश सचिव स्तर की वार्ताओं को रद्द नहीं करना चाहिए था. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत से वार्ता से पहले कश्मीरी नेताओं से बातचीत करने में कुछ भी नया नहीं था.

18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन से पाकिस्तान लौटने के दौरान विमान में मौजूद संवाददाताओं को शरीफ ने कल बताया कि बीते समय में जब भी पाकिस्तान और भारत में वार्ताएं आयोजित हुईं, हम कश्मीरी नेताओं के साथ बातचीत करते रहे. इसमें कुछ भी नया नहीं है क्योंकि हमें कश्मीर के नेताओं की राय उस मुद्दे पर लेनी ही होगी, जिसका सबसे ज्यादा संबंध उन्हीं से है.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त द्वारा नयी दिल्ली में कश्मीरी अलगाववादियों के साथ बातचीत किए जाने के कारण विदेश सचिव सुजाता सिंह की सितंबर में होने वाली इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी गई थी. उसके बाद से दोनों ही देश यह कहते आए हैं कि वे एक अर्थपूर्ण वार्ता में शामिल होना चाहते हैं, बशर्ते इसकी पहल दूसरा पक्ष करे.

द न्यूज की रिपोट के अनुसार, शरीफ ने कहा कि भारत को विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द नहीं करनी चाहिए थी. नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह के बाद उनके साथ शरीफ की मुलाकात में इस पर सहमति बनी थी.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वार्ता की प्रक्रिया को आदर, सम्मान और स्वाभिमान की स्थिति के साथ आगे बढाना चाहता है. उन्होंने कहा, हम इसमें यकीन रखते हैं और इसे हर कीमत पर बरकरार रखेंगे. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान, कश्मीर विवाद समेत सभी मुद्दों को हल करने के लिए एक अर्थपूर्ण वार्ता चाहता है.

शरीफ की ये टिप्पणियां ठंडे पड चुके भारत-पाक संबंधों में कल कुछ गरमाहट आने के बाद आई हैं, जहां मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री मोदी और शरीफ ने हाथ मिलाए और एक दूसरे का अभिवादन किया लेकिन भारत ने आगाह किया है कि इन अभिवादनों का अर्थ कुछ ज्यादा न लगाया जाए.

काठमांडो में दो दिन के विचार-विमर्श के बाद दक्षेस शिखर सम्मेलन के समापन से कुछ क्षण पहले जब मोदी और शरीफ ने हाथ मिलाए और कुछ बातचीत की तो अन्य नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों ने जोरदार तालियां बजाईं. सार्क सम्मलेन के प्रारंभिक सत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच रिश्तों में तल्खी नजर आयी थी, और कई मौकों पर दोनों ने एक-दूसरे को नजरअंदाज कर दिया था.

शरीफ ने कहा कि दक्षेस शिखर सम्मेलन में उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष के साथ दो बार हाथ मिलाए थे और एक-दूसरे का अभिवादन किया था.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा से भारत के साथ ईमानदारी से एक अर्थपूर्ण वार्ता की इच्छा रखी है और वह चाहता है कि दूसरे पक्ष की ओर से भी ऐसा ही किया जाए.

जब उनसे पूछा गया कि दोनों नेताओं के बीच का गतिरोध कैसे टूटा तो शरीफ ने कहा कि जब वह रिट्रीट की अनौपचारिक मुलाकात के लिए पहुंचे तो प्रधानमंत्री मोदी अन्य नेताओं के साथ पहले ही वहां मौजूद थे. उन्होंने अन्य से मुलाकात की और प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी हाथ मिलाया.

शरीफ ने स्पष्ट तौर पर यह भी कहा कि यदि भारत रिश्तों को बहाल करना चाहता है, तो कश्मीर मुद्दे पर पूरी गंभीरता और ईमानदारी के साथ चर्चा की जानी चाहिए.

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