गांधी और भारत

गांधी-चिंतन की दिशा में हम कितना आगे बढ़ पाये हैं? वे हमारी स्मृति में कितना बचे हैं? ऐसे प्रश्नों से जूझना उदारता से विमुख हो रहे समाज में मुश्किल है. इस मुश्किल से निकलने की रोशनी कनक तिवारी की किताब ‘रेत पर पिरामिड गांधी : एक पुनर्विचार’ से मिलती है. तिवारी जिस तरह गांधी का […]
गांधी-चिंतन की दिशा में हम कितना आगे बढ़ पाये हैं? वे हमारी स्मृति में कितना बचे हैं? ऐसे प्रश्नों से जूझना उदारता से विमुख हो रहे समाज में मुश्किल है. इस मुश्किल से निकलने की रोशनी कनक तिवारी की किताब ‘रेत पर पिरामिड गांधी : एक पुनर्विचार’ से मिलती है. तिवारी जिस तरह गांधी का पुनर्पाठ करते हैं, वह हमें गांधी के अभी तक हासिल न हो सके स्वराज को नयी शक्ल में हासिल करने के लिए पुकारता है. गांधी को हमने पुस्तकालयों, संग्रहालयों और स्मारकों में सीमित कर दिया है, जबकि आज उनके बारे में ठोस वैचारिक चिंतन की जरूरत है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




