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फ़र्रुख़ाबाद: सभी 23 बच्चे छुड़ाए गए, मुठभेड़ में अपहर्ता की मौत

Updated at : 31 Jan 2020 8:14 AM (IST)
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फ़र्रुख़ाबाद: सभी 23 बच्चे छुड़ाए गए, मुठभेड़ में अपहर्ता की मौत

उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद ज़िले के मोहम्मदाबाद क़स्बे में 23 बच्चों को बंधक बनाने वाले शख़्स सुभाष बाथम की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई है. सभी बच्चे सुरक्षित हैं. कानपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि अपहर्ता सुभाष की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई है और सभी बच्चों […]

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उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद ज़िले के मोहम्मदाबाद क़स्बे में 23 बच्चों को बंधक बनाने वाले शख़्स सुभाष बाथम की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई है. सभी बच्चे सुरक्षित हैं.

कानपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि अपहर्ता सुभाष की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई है और सभी बच्चों को बचा लिया गया है.

मोहित अग्रवाल ने बताया कि अपहर्ता प्रति बच्चा एक करोड़ रुपए की मांग कर रहा था. इसके साथ ही वो अपने ऊपर चल रहे हत्या के मुक़दमे को भी वापस लिए जाने की मांग कर रहा था.

इससे पूर्व देर रात अपहर्ता ने एक बच्चे को रिहा भी कर दिया था.

बंधक बच्चों को मुक्त कराने के लिए एटीएस के कमांडो बुलाए गए थे और इसके साथ पुलिस के तमाम अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद थे.

मोहम्मदाबाद तहसील के करसिया गांव के जिस घर में बच्चों को बंधक बनाकर रखा गया था वह घर सुभाष बाथम का ही था. पुलिस के मुताबिक़, सुभाष बाथम शातिर किस्म का अपराधी था और कई बार जेल भी जा चुका था. उसके ऊपर हत्या का भी मुक़दमा चल रहा था.

स्थानीय लोगों के मुताबिक़, गुरुवार दोपहर बेटी के जन्मदिन के बहाने सुभाष बाथम ने गांव के बच्चों को अपने घर दावत पर बुलाया था. सभी बच्चे दोपहर क़रीब तीन बजे तक उनके घर पहुंच गए. इसके बाद सुभाष बाथम ने घर के मुख्य दरवाज़े को अंदर से बंद कर लिया.

शाम क़रीब साढ़े चार बजे जब एक महिला अपने बच्चे को लेने पहुंची, तब उसे पता चला कि बच्चे सुभाष बाथम के क़ब्ज़े में हैं. महिला ने ही पुलिस को सूचना दी.

फ़र्रुख़ाबाद के पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस का पूरा प्रयास यही था कि किसी भी बच्चे को कोई नुक़सान ना पहुंचे. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दो पुलिस वाले जख़्मी हुए हैं.

बताया जा रहा है कि मौक़े पर पहुंची पुलिस को देखते ही सुभाष बाथम ने फ़ायरिंग शुरू कर दी थी और कुछ देसी बम भी फोड़े.

गांव के ही अनुपम दुबे नाम के एक व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि वह जब सुभाष से बात करने के लिए उसके घर की ओर गए तो उसने उन्हें भी गोली मार दी जो उनके पैर में लगी.

इस दौरान सुभाष बाथम लगातार धमकियां दे रहे थे. उनका दावा था कि उसके पास 30 किलो बारूद है.

अपहरण के काफी देर तक यह स्पष्ट नहीं था कि बच्चों को बंधक बनाने के पीछे उद्देश्य क्या है, बाथम सिर्फ़ विधायकों और अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे थे लेकिन बाद में स्थिति स्पष्ट हो गई.

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