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ग्रेटा थनबर्ग के पिता- 'वो ख़ुश है, पर मुझे चिंता होती है'

Updated at : 01 Jan 2020 10:42 PM (IST)
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ग्रेटा थनबर्ग के पिता- 'वो ख़ुश है, पर मुझे चिंता होती है'

<figure> <img alt="ग्रेटा थनबर्ग अपने पिता स्वान्टे थनबर्ग के साथ" src="https://c.files.bbci.co.uk/9D22/production/_110362204_6305eb76-3aba-4c39-b6a3-5944f7d5aba3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p> जानी-मानी पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के पिता ने कहा है कि वे जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान में अपनी बेटी के अग्रिम पंक्ति में जाकर मोर्चा संभालने को ‘सही नहीं समझते’ थे.</p><p>ग्रेटा के पिता स्वान्टे थनबर्ग ने बीबीसी के […]

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<figure> <img alt="ग्रेटा थनबर्ग अपने पिता स्वान्टे थनबर्ग के साथ" src="https://c.files.bbci.co.uk/9D22/production/_110362204_6305eb76-3aba-4c39-b6a3-5944f7d5aba3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p> जानी-मानी पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के पिता ने कहा है कि वे जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ अभियान में अपनी बेटी के अग्रिम पंक्ति में जाकर मोर्चा संभालने को ‘सही नहीं समझते’ थे.</p><p>ग्रेटा के पिता स्वान्टे थनबर्ग ने बीबीसी के एक कार्यक्रम में बताया कि वे जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपनी बेटी के स्कूल छोड़कर हड़ताल पर जाने के पक्ष में नहीं थे. </p><p>उन्होंने कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता बनने के बाद से ग्रेटा बहुत खुश है, लेकिन उनकी बेटी को इसे लेकर जो नफ़रत झेलनी पड़ रही है, इससे उनके मन में चिंता है.</p><p>16 साल की ग्रेटा थनबर्ग ने जलवायु परिवर्तन को लेकर जिस तरह से आंदोलन किया है उससे दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरणा मिली है.</p><p>ग्रेटा के पिता ने बीबीसी के रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में ये बातें कहीं जिसकी अतिथि-संपादक ख़ुद ग्रेटा थीं.</p><p>इस कार्यक्रम में पर्यावरण मामलों पर कई डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले प्रतिष्ठित प्रेज़ेंटर सर डेविड ऐटनबरो भी शामिल हुए. उन्होंने ग्रेटा से कहा कि उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर सारी दुनिया की आँखें खोल दी हैं.</p><p>ग्रेटा ने स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में अपने घर से कार्यक्रम में शिरकत की. उन्होंने डेविड ऐटनबरो से कहा कि कैसे उन्हें उनके काम से प्रेरणा मिली.</p><figure> <img alt="ग्रेटा थनबर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/13546/production/_110347197_67c09911-00aa-4e77-924d-bb8c02ec7ab2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>ग्रेटा थनबर्ग और सर डेविड ऐटनबरो</figcaption> </figure><p>सर डेविड ने ग्रेटा से कहा कि उन्होंने ऐसी चीज़ें हासिल की हैं जिसे इस बारे में 20 साल से मेहनत कर रहे हम में से ज़्यादातर लोग हासिल करने में नाकाम रहे हैं. </p><p>उन्होंने कहा कि ग्रेटा एकमात्र कारण थीं जिनकी वजह से जलवायु परिवर्तन ब्रिटेन के आम चुनावों का बड़ा मुद्दा रहा. </p><p>ग्रेटा का नाम इस साल के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनिया के नेताओं से कदम उठाने की माँग की और उनके आंदोलन की वजह से एक साथ दुनिया के कई स्कूलों में हड़ताल किए गए.</p><p><strong>डिप्रेशन </strong><strong>से लड़ती ग्रेटा</strong></p><p>बीबीसी के कार्यक्रम में ग्रेटा के पिता ने बताया कि स्कूल स्ट्राइक शुरु करने के तीन-चार साल पहले उनकी बेटी डिप्रेशन से लड़ती रही.</p><p>उन्होंने कहा,&quot;ग्रेटा ने बात करना बंद कर दिया था. स्कूल जाना भी छोड़ दिया था.&quot; </p><p>वो बताते हैं कि ग्रेटा का खाना छोड़ देना उनके लिए एक बुरे सपने जैसा था. </p><p>उन्होंने कहा कि ग्रेटा को ठीक करने के लिए उन्होंने ग्रेटा और उनकी छोटी बहन बियाटा के साथ घर पर ज़्यादा समय बिताना शुरू किया. </p><p>ग्रेटा की मां मालेना अर्नमैन एक ओपेरा गायिका हैं. उन्होंने भी परिवार के साथ समय बिताने के लिए कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए. </p><p>स्वान्टे बताते हैं कि उन्होंने डॉक्टरों की भी मदद ली. ग्रेटा जब 12 साल की थी, तब पता चला कि ग्रेटा को ऐस्पर्गर्स सिंड्रोम है, जो ऑटिज़्म जैसी एक बीमारी है. </p><p>ग्रेटा बताती हैं कि इस वजह से ही वो लीक से अलग हट कर सोच पाती हैं.</p><p>बीमारी का पता चलने के बाद कुछ सालों तक ग्रेटा और उनके परिवार ने जलवायु परिवर्तन को लेकर रिसर्च और चर्चा की और ग्रेटा में इस मुद्दे को लेकर जुनून बढ़ने लगा.</p><p>मानवाधिकार को लेकर सजग ग्रेटा के पिता बताते हैं कि ग्रेटा के जुनून का ये आलम था कि उसने अपने मां-बाप ही पाखंडी बताना शुरु कर दिया और कहा, &quot;अगर हम जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो आप किन मानवाधिकारों की बात करते हैं&quot; </p><p>वो बताते हैं कि ग्रेटा को अपने माता-पिता के बदलते व्यवहा से पर्यावरण प्रेमी होने की ऊर्जा मिली. </p><p>ग्रेटा की मां ने हवाई जहाज़ से सफ़र करना छोड़ दिया है और उनके पिता शाकाहारी बन गए हैं.</p><p>ग्रेटा और उनके पिता न्यूयॉर्क और मैड्रिड में हुए संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नाव से गए थे जिससे पर्यावरण को कोई नुक़सान नहीं पहुँचता.</p><p>पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव के कारण ग्रेटा ने हवाई यात्रा करने से मना कर दिया था.</p><p>स्वान्टे कहते हैं, &quot;मैंने ये सब इसलिए किया क्योंकि ये सब सही था. मैंने ये सब पर्यावरण बचाने के लिए नहीं किया, अपनी बच्ची को बचाने के लिए किया.&quot; </p><p>&quot;मेरे पास दो बेटियां हैं और सच कहूं तो ये ही दोनों मेरे लिए मायने रखती हैं. मैं बस इन्हें खुश देखना चाहता हूं&quot;</p><p>ग्रेटा के पिता बताते हैं कि एक्टिविस्ट बनने के बाद ग्रेटा में बदलाव आए हैं, अब वो खुश रहने लगी हैं.</p><p>&quot;आपको लगता होगा कि ग्रेटा एक आम नहीं, ख़ास लड़की है और बहुत मशहूर है. लेकिन मेरे लिए वो एक सामान्य लड़की है. वो दूसरे लोगों की तरह बाकी सभी चीज़ें कर सकती है.&quot;</p><p>&quot;वो आस-पास नाचती है, हंसती है, हम साथ में बहुत मस्ती करते हैं, वो जीवन में अच्छी जगह पर है&quot;.</p><p>स्वान्टे बताते हैं कि जबसे ग्रेटा की स्कूल स्ट्राइक वायरल हुई है तबसे ग्रेटा को बहुत से अपशब्दों का सामना करना पड़ता है. ये वो लोग हैं जो पर्यावरण को बचाने के लिए अपना लाइफ़स्टाइल नहीं बदलना चाहते. </p><figure> <img alt="ग्रेटा थनबर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/0112/production/_110347200_c6a480e3-edb2-4f81-9b14-824b70db43de.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>ग्रेटा पहले बता चुकी हैं कि किस तरह लोग उन्हें उनके कपड़ों, उनके व्यवहार और उनके अलग होने के वजह से उन्हें अपशब्द कहते हैं. </p><p>ग्रेटा के पिता बताते हैं कि वो फेक न्यूज़ को लेकर चिंतित है. वो सभी चीज़ें जो लोग ग्रेटा के बारे में गढ़ते हैं, उनसे नफ़रत पैदा होती है. </p><p>साथ ही वो ये भी कहते हैं कि उनकी बेटी बेहतर तरीके से आलोचना से निपट लेती है.</p><p>&quot;सच कहूं तो मुझे नहीं पता वो ये कैसे करती है लेकिन ज़्यादातर समय वो बस हंसती है उसे ये बहुत मज़ाकिया लगता है.&quot;</p><p>साथ ही वो कहते हैं कि अब ग्रेटा 17 साल की होने जा रही है तो उसे यात्रा के दौरान किसी के साथ की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.</p><p>&quot;अगर उसे मेरी ज़रूरत पड़ेगी, तो मैं उसके साथ जाने की कोशिश करूंगा. लेकिन वो ज़्यादातर चीज़ें अपने आप ही कर लेगी जो कि बहुत ही अच्छा है&quot;.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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