सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र पर तीखी बहस, कल फ़ैसला

Updated at : 25 Nov 2019 11:00 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र पर तीखी बहस, कल फ़ैसला

<p>महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विधानसभा में कब बहुमत साबित करना होगा इस पर फ़ैसला मंगलवार को आएगा.</p><p> इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है. इस तरह से बीजेपी को महाराष्ट्र में बहुमत साबित करने के लिए एक और दिन का वक़्त मिल गया है. </p><p>उधर एनसीपी, कांग्रेस और शिव […]

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<p>महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विधानसभा में कब बहुमत साबित करना होगा इस पर फ़ैसला मंगलवार को आएगा.</p><p> इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है. इस तरह से बीजेपी को महाराष्ट्र में बहुमत साबित करने के लिए एक और दिन का वक़्त मिल गया है. </p><p>उधर एनसीपी, कांग्रेस और शिव सेना ने 162 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपने का दावा किया है. एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा है कि बीजेपी को समर्थन देने वाले अजित पवार को मना लिया जाएगा. </p><p>सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 80 मिनट की सुनवाई में सभी पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं. ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की ओर से दलील देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने 48 एनसीपी विधायकों के समर्थन की चिट्ठी दिखाते हुए कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि उनके पास 54 विधायकों का समर्थन है और हमारे पास भी 48 विधायकों का. </p><p>उन्होंने कहा, ”क्या सुप्रीम कोर्ट इसकी अनदेखी कर सकता है. जब दोनों ही पक्ष बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं तो देर किस बात की है.” </p><p>शनिवार सुबह अचानक से पता चला कि देवेंद्र फडणवीस को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की. </p><p>शिव सेना की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुबह 5.17 पर राष्ट्रपति शासन हटाने की क्या जल्दी थी? सिब्बल ने कहा, ”ऐसी कौन सी आपातकाल की स्थिति आ गई थी कि देवेंद्र फडणवीस को सुबह आठ बजे शपथ दिलवाई गई. जब ये बहुमत का दावा कर रहे हैं तो इसे साबित करने से क्यों बच रहे हैं.” </p><p>राज्यपाल के सचिवालय की ओर से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 22 नवंबर को अजित पवार ने चिट्ठी लिखा समर्थन देने की घोषणा की थी. </p><p>तुषार मेहता ने अजित पवार के समर्थन की चिट्ठी को भी कोर्ट के सामने पेश किया. </p><p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से पैरवी करते हुए मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि एनसीपी के 54 विधायक अजित पवार और फडणवीस के साथ हैं.</p><p>उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की ओर से कहा, &quot;एक पवार उनके साथ हैं, एक पवार हमारे साथ हैं. यह एक पारिवारिक झगड़ा हो सकता है. हम नहीं बल्कि वो हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं. हम 170 विधायकों के समर्थन के साथ राज्यपाल के पास गए और उन्होंने हमारे दावे को स्वीकार किया. लिहाज़ा राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया और मैंने शपथ ली.&quot;</p><p>मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल की आलोचना की ज़रूरत नहीं थी और बहुमत परीक्षण तो होना ही है.</p><p>इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि अभी असल सवाल ये है कि मुख्यमंत्री के पास बहुमत है या नहीं और इसके लिए फ्लोर टेस्ट होना चाहिए.</p><p>इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट होना ही है लेकिन वो चार दिन में होगा या दस दिन में या पांच दिन में, क्या कोई कोर्ट इस बारे में फैसला ले सकती है?</p><figure> <img alt="कोश्यारी और फडणवीस" src="https://c.files.bbci.co.uk/13773/production/_109813797_gettyimages-1166234186.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>मुकुल रोहतगी ने देवेंद्र फडणवीस की ओऱ से कहा कि वे शपथ पत्र दे सकते हैं कि राज्यपाल और बीजेपी ने क़ानून-सम्मत तरीक़े से काम किया है. किसी ने नहीं कहा कि समर्थन की चिट्ठी फ़र्ज़ी है.</p><p>मुकुल रोहतगी ने कहा कि हम इस अर्ज़ी पर शपथ पत्र दाख़िल करेंगे और अभी अंतरिम आदेश की ज़रूरत नहीं है.</p><p>राज्यपाल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी की और जवाब देने के लिए दो-तीन दिनों का वक़्त मांगा. उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने अपने अधिकार के तहत सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौक़ा दिया था.</p><p>तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा है कि राज्यपाल को सौंपी गई चिट्ठी में अजित पवार ने ख़ुद को एनसीपी के विधायक दल का नेता बताया है और 54 विधायकों के समर्थन के साथ देवेंद्र फडणवीस को समर्थन देने की बात कही है. इस चिट्ठी के साथ एनसीपी के 54 विधायकों के हस्ताक्षर हैं.</p><p>ये चिट्ठी मराठी में लिखी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसका अनुवाद मांगा है. </p><p>तुषार मेहता ने राज्यपाल की ओर से देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने का न्योता देने की चिट्ठी भी शीर्ष अदालत में पेश की है. इन दोनों चिट्ठियों की मांग सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में की थी.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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