फॉरेंसिक अकाउंटिंग में बनाएं करियर, जानें कुछ जरूरी बातें

Updated at : 19 Nov 2019 2:12 PM (IST)
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फॉरेंसिक अकाउंटिंग में बनाएं करियर, जानें कुछ जरूरी बातें

देश में बढ़ते आर्थिक अपराधों के इस दौर में फॉरेंसिक अकाउंटिंग के पेशेवरों का महत्व और उनकी मांग काफी बढ़ गयी है. इस कारण इसे भविष्य के लिहाज से रोजगार का एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है. यह अकाउंटिंग की ही एक शाखा है, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए […]

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देश में बढ़ते आर्थिक अपराधों के इस दौर में फॉरेंसिक अकाउंटिंग के पेशेवरों का महत्व और उनकी मांग काफी बढ़ गयी है. इस कारण इसे भविष्य के लिहाज से रोजगार का एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है. यह अकाउंटिंग की ही एक शाखा है, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए अकाउंटिंग के सिद्धांतों के साथ ऑडिटिंग और जांच-पड़ताल के हुनर का इस्तेमाल किया जाता है. यह काम करने वाले पेशेवरों को फॉरेंसिक अकाउंटेंट कहा जाता है. वह अनुभवी ऑडिटर होते हैं और वित्तीय घपलों का पता लगाने के लिए किसी व्यावसायिक संस्थान (कंपनी, फर्म) के खातों (अकाउंट्स) पर निगरानी रखने का कार्य करते हैं. फॉरेंसिक अकाउंटिंग के लिए सबसे जरूरी होती है अकाउंटिंग की अच्छी जानकारी. इसके बाद ऑडिटिंग, रिस्क असेसमेंट और फ्रॉड डिटेक्शन (घपलों को पहचानना) आदि की व्यावहारिक समझ को इस पेशे में आवश्यक माना जाता है. इस पेशे से जुड़े लोगों को अपने अकाउंटिंग, ऑडिटिंग और खोजबीन के हुनर से आर्थिक घोटालों से संबंधित साक्ष्यों का विश्लेषण करके उनका अर्थ निकालना होता है.

प्रमुख कार्य

– वित्तीय साक्ष्यों की जांच और उनका विश्लेषण करना.

– साक्ष्यों (वित्तीय) की प्रस्तुति और उनके विश्लेषण में मदद के लिए कंप्यूटर आधारित एप्लिकेशन तैयार करना.

– जांच में मिलने वाले तथ्यों को रिपोर्ट और दस्तावेजों के संग्रह के रूप में प्रस्तुत करना.

– अदालत की कार्यवाही में मदद करना यानी न्यायालय में विशेषज्ञ के रूप में गवाही देना और सबूतों को मजबूत करने के लिए दृश्यात्मक सामग्री उपलब्ध कराना.

जरूरी हैं फॉरेंसिक अकाउंटेंट

आमतौर पर सभी बड़ी अकाउंटिंग फर्मों में फॉरेंसिक अकाउंटेंट की जरूरत होती है. इन फर्मों में उनका कार्य कंपनियों के बीच होने वाले गठजोड़ों और अधिग्रहण समझौतों की जांच करना, विशेष ऑडिट करना, आर्थिक अपराधों तथा टैक्स की गड़बड़ी से संबंधित मामलों की जांच करना होता है. तलाक, व्यापार और दुर्घटनाओं से संबंधित क्लेम के मामलों की जांच में भी फॉरेंसिक अकाउंटेंट की जरूरत होती है. वह अपनी इच्छा के अनुसार नौकरी के लिए सरकारी या निजी क्षेत्र की कंपनियों का रुख कर सकते हैं.

प्रमुख रोजगारदाता क्षेत्र

– पब्लिक अकाउंटिंग फर्म

– प्राइवेट कॉर्पोरेशंस

– बैंक

– पुलिस एजेंसियां

– सरकारी एजेंसियां

– इंश्योरेंस कंपनियां

– लॉ फर्म

जरूरी गुण

– गहन विश्लेषणात्मक कौशल

– जांच-पड़ताल का हुनर

– तथ्यों को बारीकी से जानने की इच्छा

– किसी दबाव में न आते हुए काम को पूरा करने की दृढ़ता

– अपने काम के प्रति पूर्ण निष्ठा

– जिज्ञासा

– रचनात्मक सोच

उपलब्ध पाठ्यक्रम

– पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फॉरेंसिक अकाउंटिंग

– सर्टिफिकेट कोर्स इन फॉरेंसिक अकाउंटिंग प्रोफेशनल

– सर्टिफाइड एंटी-मनी लॉन्डरिंग एक्सपर्ट

– सर्टिफाइड बैंक फॉरेंसिक अकाउंटिंग

– सर्टिफाइड विजिलेंस एंड इंवेस्टिगेशन एक्सपर्ट

योग्यता

– किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री प्राप्त हो

संबंधित संस्थान

– द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, नई दिल्ली

– द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा

– इंडिया फॉरेंसिक, पुणे

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