लाख चेताने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ नहीं की कोई कार्रवाई, एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होना तयः रिपोर्ट

Updated at : 07 Oct 2019 10:20 AM (IST)
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लाख चेताने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ नहीं की कोई कार्रवाई, एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होना तयः रिपोर्ट

नयी दिल्लीः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरी दुनिया में भले ही आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हों लेकिन उनके इस फर्जी दावे की पोल एख बार फिर खुल गई है. वैश्विक मंच द्वारा लाख चेताने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकवादियों पर कोई एक्शन नहीं लिया. दुनिया भर में टेरर फंडिंग […]

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नयी दिल्लीः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरी दुनिया में भले ही आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हों लेकिन उनके इस फर्जी दावे की पोल एख बार फिर खुल गई है. वैश्विक मंच द्वारा लाख चेताने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकवादियों पर कोई एक्शन नहीं लिया.

दुनिया भर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एशिया पैसिफिक ग्रुप की रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. बता दें कि आतंकवादियों को रोकने के लिए पाकिस्तान ने एफएटीएफ को 15 महीने का अपना ऐक्शन प्लान बताया था और कहा था कि वह टेरर फंडिंग को रोकने के उपाय करेगा. लेकिन उसका चेहरा बेनकाब हो गया है.

एफएटीएफ ( FATF) के एशिया पैसिफिक ग्रुप ने कहा है पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सिक्यॉरिटी काउंसिल रेज़ॉलूशन 1267 को लागू करने के लिए सही कदम नहीं उठाए. उसने यूएन द्वारा प्रतिबंधिंत आतंकवादियों, हाफिज सईद, मसूर अजहर और एलईटी, जेयूडी व आफआईएफ जैसे आतंकी संगठनों को लेकर नरमी बरती और ठोस ऐक्शन नहीं लिया.

गौरतलब है कि अगले सप्ताह पेरिस में फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का सालाना अधिवेशन होना है. आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में विफल रहने की वजह से इस अधिवेशन में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. पाकिस्तान पहले से ही एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट में है.

FATF क्या है?
FATF पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम गैर-कानून आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है. इसका गठन 1989 में किया गया था. FATF की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है.
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