मोटापे के लिए ख़ुद को ना कोसें

Updated at : 01 Oct 2019 10:42 PM (IST)
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मोटापे के लिए ख़ुद को ना कोसें

<figure> <img alt="Woman checking her phone in the gym" src="https://c.files.bbci.co.uk/18151/production/_108914689_gettyimages-948698936.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>शीर्ष मनोचिकित्सकों की राय है कि मोटापा कोई विकल्प नहीं है जिसे आपने चुना हो और इसके लिए ख़ुद को दोष देने से हालात और बदतर हो सकते हैं. </p><p>रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि लांछन को कम करने […]

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<figure> <img alt="Woman checking her phone in the gym" src="https://c.files.bbci.co.uk/18151/production/_108914689_gettyimages-948698936.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>शीर्ष मनोचिकित्सकों की राय है कि मोटापा कोई विकल्प नहीं है जिसे आपने चुना हो और इसके लिए ख़ुद को दोष देने से हालात और बदतर हो सकते हैं. </p><p>रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि लांछन को कम करने के लिए इसके लिए इस्तेमाल होने वाले संबोधन शब्दों को बदलना चाहिए जैसे ‘मोटा व्यक्ति’ की जगह ‘मोटापे से ग्रस्त’ व्यक्ति कहा जाए.</p><p>इसमें ये भी कहा गया है कि स्वास्थ्य कर्मियों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाए कि वो वज़न कम करने की बात बहुत सहारा देने वाले अंदाज़ में करें. </p><p>असल में हाल ही में कैंसर चैरिटी संस्था ने <a href="https://www.bbc.co.uk/news/health-48826850?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">एक विज्ञापन अभियान</a> शुरू किया था जिसमें मोटापे पर तंज़ कसने (फ़ैट शेमिंग) के लिए उसकी काफ़ी आलोचना की गई थी. </p><p>साल 2005 से 2017 के बीच ब्रिटेन में मोटापे का स्तर 18% बढ़ा है और स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में भी इसी अनुपात में बढ़ोत्तरी हुई है. </p><p>यानी, ब्रिटेन में चार वयस्कों में से एक मोटापे का शिकार है जबकि दो तिहाई का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा है या वो मोटे हैं. </p><p>ब्रिटिश साइकोलॉजिकल सोसाइटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि लेकिन इस बढ़ोत्तरी के पीछे पूरे ब्रिटेन में अचानक हतोत्साहित होना कारण नहीं है, बल्कि ये उससे भी कहीं जटिल गुत्थी है. </p><p>रिपोर्ट में नतीजा निकाला गया है कि ‘किसी व्यक्ति में इच्छाशक्ति की कमी आना इसका कारण नहीं है.’ </p><h1>तनाव और सदमा</h1><p>रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘उन लोगों में वज़न बढ़ने की सबसे अधिक आशंका होती है जिनमें मोटापा विकसित होने का अनुवांशिक ख़तरा अधिक होता है या जिनकी ज़िंदगी में काम का दबाव, स्कूल और सामाजिक माहौल का दबाव अधिक होता है, जिससे उनमें अधिक खाने और निष्कृय रहने की इच्छा पैदा होती है.’ </p><p>इसके अनुसार, &quot;ग़रीब इलाक़ों में रहने वाले लोगों में ज़िंदगी में बड़े बदलाव और सदमे की वजह से तनाव का स्तर बहुत अधिक होता है. इनके आस पड़ोस में भी मौक़े कम होते हैं और शारीरिक व्यायाम और पोषण युक्त सस्ते खाने की सुविधा बहुत सीमित होती है.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/vert-fut-47774102?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">वक़्त पर खाने से मोटापा हो सकता है कंट्रोल?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/vert-fut-47304295?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मोटापा की वजह क्या पेट के कीटाणु हैं</a></li> </ul><figure> <img alt="A woman eating a carrot" src="https://c.files.bbci.co.uk/10C21/production/_108914686_gettyimages-1164676420.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें मानसिक अनुभव की भी एक बड़ी भूमिका होती है. मोटापे से छुटकारा पाने के लिए स्वास्थ्य सेवा की मदद लेने वाले आधे वयस्कों का बचपन मुश्किलों से गुज़रा होता है. </p><p>इसके अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों, नर्सों, जनरल फ़िजीशियन और नीति निर्माताओं की वजह से, अधिक वज़न के कारण शर्मिंदगी झेलने से पैदा होने वाले तनाव का नतीजा अक्सर ये होता है कि खाने की आदत बढ़ जाती है और वज़न भी बढ़ जाता है.</p><p>ब्रिटिश कॉमेडियन जेम्स कॉर्डन ने हाल ही में फ़ैट शेमिंग के <a href="https://www.bbc.co.uk/news/health-49714697?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ख़िलाफ़ बोला</a> था. उन्होंने कहा था, &quot;अगर मोटे लोगों का मज़ाक़ उड़ाने से उनका वज़न कम होता तो स्कूलों में कभी कोई मोटा बच्चा होता ही नहीं.&quot;</p><p><a href="https://twitter.com/latelateshow/status/1172571955314094080">https://twitter.com/latelateshow/status/1172571955314094080</a></p><p>इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले लेखक और बेटफ़ोर्डशायर विश्वविद्यालय में साइकोलॉजी और बिहैवियर डिज़ाइन के रीडर मनोचिकित्सक डॉ एंगेल चैटर का कहना है कि मनोचिकित्सक अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने में कर सकते हैं ताकि वो मोटापे के बारे में बेहतर संवाद कर पाएं. </p><p>वो कहती हैं, &quot;अगर मोटापे का इलाज बहुत आसान होता, तो हम ये बात नहीं कर रहे होते और ये रिपोर्ट नहीं तैयार करनी पड़ती.&quot;</p><p>उनके अनुसार, &quot;हो सकता है कि आपकी इच्छा शक्ति पूरी दुनिया में सबसे अधिक हो लेकिन अगर आपको सेहतमंद भोजन, सही माहौल, एक अच्छी शुरुआती ज़िंदगी नहीं उपबल्ध है तो ये बहुत मुश्किल है.&quot;</p><h1>धूम्रपान से सबक लें</h1><p>रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को मोटापे के बारे में वही रुख़ अपनाना चाहिए जो धूम्रपान को लेकर वो अपनाती है. </p><p>ब्रिटिश साइकोलॉजिकल सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सर्ब बाजवा के अनुसार, &quot;दशकों से सभी स्तरों पर इसने एहतियात बरते हैं. सरकारी नीतियों से लेकर धूम्रपान करने वाले एक एक व्यक्ति की मदद करने तक, लेकिन अब हम देख रहे हैं कि धूम्रपान के स्तर में काफ़ी कमी आई है और इसके कारण आने वाली स्वास्थ्यगत दिक्क़तें भी कम हुई हैं.&quot;</p><figure> <img alt="मोटापा" src="https://c.files.bbci.co.uk/9DAA/production/_109026304_c8a61557-482c-4727-a0cb-3c894bfe29de.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>&quot;ठीक इसी तरह मोटापे से निपटने के लिए स्वास्ध्य सेवा की मदद के लिए मनोचिकित्सकों के पास विज्ञान और क्लीनिकल अनुभव पर्याप्त हैं.&quot;</p><p>&quot;हम मदद कर सकते हैं, व्यक्तिगत लोगों को मदद पहुंचाने के रास्ते निकालने से लेकर सार्वजनिक नीति बनाने तक में, जोकि ऐसा माहौल पैदा कर सकता है जिसमें लोग अधिक वज़न से आसानी से बच सकें.&quot;</p><p>हालांकि, मोटापे को रोग मानने के पक्ष में मनोचिकित्सक नहीं हैं क्योंकि उनका कहना है कि इससे व्यवहारगत बदलाव से ध्यान हट जाएगा जोकि सफलता पाने का एक तरीक़ा हो सकता है. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते 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