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70 साल के दौरान लोकसभा में मात्र 7 फीसदी बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

Updated at : 20 Mar 2019 5:22 PM (IST)
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70 साल के दौरान लोकसभा में मात्र 7 फीसदी बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

नयी दिल्ली : पहली लोकसभा में महिलाओं सांसदों की संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या का 4.4 फीसदी थी जो 2014 में बढ़कर करीब 11 फीसदी हो गयी. हालांकि, यह अभी भी वैश्विक औसत 20 फीसदी से काफी कम है. पहली लोकसभा में निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या 489 थी, जबकि 16वीं लोकसभा में कुल […]

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नयी दिल्ली : पहली लोकसभा में महिलाओं सांसदों की संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या का 4.4 फीसदी थी जो 2014 में बढ़कर करीब 11 फीसदी हो गयी. हालांकि, यह अभी भी वैश्विक औसत 20 फीसदी से काफी कम है. पहली लोकसभा में निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या 489 थी, जबकि 16वीं लोकसभा में कुल सदस्य संख्या 543 थी. अब तक के सभी लोकसभा चुनाव परिणामों पर गौर करें तो महिला सदस्यों की संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या के 3.4 फीसदी से 11.2 फीसदी के बीच रही है.

इसे भी देखें : लोकसभा चुनाव में भी मिले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण

दरअसल, पहले आम चुनाव के बाद गठित पहली लोकसभा से लेकर 16वीं लोकसभा तक महिला सांसदों की संख्या 19 से 62 के बीच रही है. जहां पहली लोकसभा में 22 महिलाएं जीतकर आयी थीं, वहीं 1977 में छठी लोकसभा में सबसे कम 19 महिलाएं (3.4 फीसदी) जीतीं. पिछले लोकसभा चुनाव के बाद गठित 16वीं लोकसभा में महिला उम्मीदवारों की संख्या 62 (करीब 11 फीसदी) रही.

राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े वादों के बावजूद पहली लोकसभा से लेकर अब तक सदन में महिलाओं की मौजूदगी निराशाजनक रही है. हालांकि, इस बार ओड़िशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की घोषणा की है.

पश्चिम बंगाल में तृणमूल प्रमुख एवं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कहा है कि इस सूची में 40.5 फीसदी उम्मीदवार महिलाएं हैं तथा सूची में 17 महिला उम्मीदवारों के नाम हैं. पार्टी ने पिछले चुनावों की तुलना में पांच ज्यादा महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजद और तृणमूल कांग्रेस की इस पहल के कारण भाजपा, कांग्रेस और वामदल सहित प्रमुख दलों पर आसन्न लोकसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों को अधिक संख्या में टिकट देने का दबाव बढ़ गया है. पहली लोकसभा में 22 महिलाएं जीती थीं, जो सदन की कुल संख्या का 4.4 फीसदी थी.

वर्ष 1957 में दूसरी लोकसभा में 27 महिलाएं चुनकर आयी थीं, जो कुल संख्या का 5.4 फीसदी थी. वहीं, 1962 में तीसरी लोकसभा में 34 महिलाएं जीत कर आयीं, जो 6.7 फीसदी थी. चौथी लोकसभा में 31 महिलाएं (5.9 फीसदी) जीत कर आयीं, तो पांचवी लोकसभा में 22 महिला सदस्यों (4.2 फीसदी) ने जीत दर्ज की.

वहीं, छठी लोकसभा में 19 महिलाएं (3.4 फीसदी), सातवीं लोकसभा में 28 महिलाएं (5.1 फीसदी), आठवीं लोकसभा में 44 महिलाएं (8.11 फीसदी), नौवीं लोकसभा में 28 महिला सांसद (5.3 फीसदी) जबकि 10वीं लोकसभा में 36 महिलाएं (7 फीसदी) सांसद चुनकर आयीं. 11वीं लोकसभा में 40 महिलाएं जीतकर आयीं, जो संख्याबल का 7.4 फीसदी थी, तो 12वीं लोकसभा में 44 महिलाएं (8 फीसदी) आयीं.

13वीं लोकसभा में 48 महिलाएं चुनकर आयीं, जो कुल संख्याबल का 8.8 फीसदी थी, जबकि 14वीं लोकसभा में 45 महिलाएं चुनकर आयीं, जो 8.1 फीसदी थी. 15वीं लोकसभा में 59 महिलाएं चुनकर आयीं, जो 10.9 फीसदी थी. वहीं, 16वीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 62 है, जो संख्याबल का करीब 11 फीसदी है.

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