कई चांद थे सरे आसमां

वुसतुल्लाह ख़ान बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान चंद्रमा को आप भला क्या समझते हैं, धरती के इश्क़ में दिन-रात गोल चक्कर काटने वाला एक गोलू-मटोलू, अपने मेहबूब का चेहरा, चरखा कातने वाली बुढ़िया का घर, आप भले कुछ भी समझते रहें, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. हां, मुझे दो दफ़ा ज़रूर फ़र्क पड़ता है, जब कुछ मौलवी […]
चंद्रमा को आप भला क्या समझते हैं, धरती के इश्क़ में दिन-रात गोल चक्कर काटने वाला एक गोलू-मटोलू, अपने मेहबूब का चेहरा, चरखा कातने वाली बुढ़िया का घर, आप भले कुछ भी समझते रहें, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
हां, मुझे दो दफ़ा ज़रूर फ़र्क पड़ता है, जब कुछ मौलवी चंद्रमा पर सेंध लगाकर लटक जाते हैं और इस ग़रीब को अपनी-अपनी ओर खींचने लगते हैं.
इन लोगों को सारा साल कोई लेना-देना नहीं होता कि किस महीने का चांद किस तारीख़ को कितने बजकर कितने मिनट पर निकला.
अब्बा के आंसू पर बच्चे क्या कहते हैं?
लेकिन अगर रोज़ों का रमज़ानी चांद और छोटी ईद का चांद इन धार्मिक ठेकेदारों से पूछे बिना आकाशी किवाड़ के पीछे से झांक भी ले, तो इस बेचारे से पूछताछ शुरू हो जाती है, क्यों निकले, पहले से बता नहीं सकते, कल भी तो निकल सकते थे, हम मानते ही नहीं कि तुम आज निकले हो, हम तो कल से गिनना शुरू करेंगे, चलो अब अंदर जाओ, नहीं-नहीं बाहर आओ, अंदर जाता है कि नहीं, अबे, बाहर निकलता है कि दूं एक फतवा रख के…
मुझे नहीं मालूम कि भारत में यह तमाशा कितना होता है मगर पाकिस्तान में तो जिस साल रमज़ान और ईद का मुन्ना सा बारीक सा चांद एक बार एक साथ ही टिपाई दे जाए, तो जनता लोग बहुत बोर हो जाती है, यार यह भी क्या बात हुई, इस दफ़ा बस एक ही चांद!
एक चांद
लेकिन एक चांद वाला भाग्यवान समय कभी-कभी ही आता है. अधिकतर तो यही होता है कि रमज़ान के कम से कम दो या कभी-कभी तीन चांद भी निकल आते हैं.
तरीक़ा इसका यूं है कि सरकारी चंद्रमा ताड़ू कमेटी के मौलाना हज़रात पाकिस्तान के एक कोने में कराची की 25 मालों वाली एक बैंक बिल्डिंग पर टेलीस्कोप लेकर चढ़ जाते हैं. और कुछ मौलवी शाहबान देश के दूसरे कोने यानी पेशावर की मस्जिद कासिम ख़ान के मीनारे पर मुफ़्ती शहाबुद्दीन पोपलज़ई की अगुआई में चढ़कर चांद को फंसाने की कोशिश करते हैं.
दो सौ वर्ष पुरानी मस्जिद कासिम ख़ान के पेशे इमाम मुफ़्ती पोपलज़ई और उनके पुरखे पिछले 80 वर्षों से चंद्रमा के जाने-माने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हैं.
आमतौर से जब सऊदी अरब में रमज़ान या ईद का चांद दिखाई देता है, तो उसके अगले दिन पाकिस्तान में भी कहीं न कहीं चांद दिख जाता है.
लेकिन मुफ़्ती पोपलज़ई का चमत्कार ये है कि वो चाहें तो सऊदी अरब से पहले भी चांद दिखवा सकते हैं.
और किसी एंपायर स्टेट बिल्डिंग या माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर नहीं, बल्कि अपनी ही मस्जिद की छत से, जो और जैसा चांद देखना चाहें, देख लेते हैं. पूरा पाकिस्तान एक तरफ़, मुफ़्ती पोपलज़ई एक तरफ़.
इस बार भी दो चांद
इस बार भी यही हुआ, परसों उन्होंने रात के 11 बजे पहली तारीख़ का चांद निकलवा दिया.
अब ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के अधिकतर मुसलमान मुफ़्ती साहब के कहने पर आज दूसरा और बाक़ी पाकिस्तान सेंट्रल गवर्मेंट की चांद दर्शाने वाली कमेटी के कहने पर पहला रोज़ा रख रहा है.
रमज़ान और ईद का चांद हर साल कहीं निकले न निकले पेशावर में क्यों सबसे पहले निकल पड़ता है, ये चक्कर क्या है!
कुछ जलने-कुढ़ने वाले यहां तक कहते हैं, कि पेशावर में 12-14 साल के लड़के को भी प्यार से चंद्रमा पुकारते हैं, इसलिए, शायद…हो सकता है, वगैरह, वगैरह…
मगर हम इस तरह के सस्ते आरोपों से बिल्कुल भी सहमत नहीं.
रॉकेट साइंस
क्या वाकई, रमज़ान और ईद का चांद देखना कोई रॉकेट साइंस है?
सिवाय पाकिस्तान के हर देश में जब-जब सरकार कहती है कि चांद निकल आया तब तब लोग एक दूसरे को मुबारकबाद देते हुए झप्पी पा लेते हैं.
ऐसे-ऐसे कैलेंडर बन चुके हैं, और गिनतियां हो चुकी हैं, जिससे तुरंत पता चल जाता है कि सौ वर्ष बाद कौन सा चांद किस दिन और समय में निकलेगा.
मगर इसका क्या किया जाए कि मौलवी साहब जापानी एयरकंडीशंड पजेरो में बैठकर, कोरिया का मोबाइल कान से लगाए, बॉडीगॉर्डों के हाथ में रूसी क्लाशिनिकोफ़ थमाए, रेबैन का चश्मा उतारकर, ब्रिटेन की टेलीस्कोप घुमाते-घुमाते बारीक चांद अपने ही दीदों से देखने पर अड़े बैठे हैं और चंद्रमा की स्थिति दिखाने वाले वैज्ञानिक डेटा को पश्चिमी साम्राज्य की साज़िश बताते हैं.
सच्ची बात यह है कि अगर ये पुरोहित वैज्ञानिक तरीक़े से चांद का हिसाब-किताब लगाकर मुसलमानों को इस संदर्भ में बांटने से रुक जाएं, तो फिर उन्हें उस्ताद जी कौन कहेगा?
वैसे भी आपको हर रमज़ान और ईद पर एक चांद फ़्री में मिल रहा है. तो फिर टेंशन काहे को लेने का!
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




