घर के आंगन से स्विटज़रलैंड तक!

Updated at : 27 Jun 2014 11:41 AM (IST)
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घर के आंगन से स्विटज़रलैंड तक!

मधु पाल मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए स्विटज़रलैंड की हसीन वादियों में, ख़ूबसूरत शिफॉन की साड़ी पहने हीरोइन और गाना गाता हीरो. ऐसे सीन अब सिर्फ़ बड़े पर्दे ही नहीं, बल्कि छोटे पर्दे पर भी आम हैं. भारतीय टीवी का कैनवास लगातार बड़ा होता जा रहा है और अब निर्माता अपने सीरियल की […]

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स्विटज़रलैंड की हसीन वादियों में, ख़ूबसूरत शिफॉन की साड़ी पहने हीरोइन और गाना गाता हीरो. ऐसे सीन अब सिर्फ़ बड़े पर्दे ही नहीं, बल्कि छोटे पर्दे पर भी आम हैं.

भारतीय टीवी का कैनवास लगातार बड़ा होता जा रहा है और अब निर्माता अपने सीरियल की शूटिंग के लिए और इसे आलीशान और भव्य बनाने के लिए विदेश जाने से भी गुरेज़ नहीं कर रहे हैं.

(‘झलक’ से दृष्टि की छुट्टी)

मशहूर डेली सोप सीरियल ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ के कुछ एपिसोड की शूटिंग के लिए इसके प्रमुख कलाकार सिडनी गए थे.

इन एपिसोड में हीरो और हीरोइन के हनीमून वाला हिस्सा शूट किया गया.

हाल के दिनों में ‘दिया और बाती हम’ की शूटिंग सिंगापुर में, ‘संस्कार’ की शूटिंग न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की शूटिंग बैंकॉक में और ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की शूटिंग लंदन में की गई.

(सनी लियोनी का नया अवतार)

‘दिया और बाती हम’ में लीड रोल निभा रही अभिनेत्री दीपिका सिंह कहती हैं, "मुझे अपने देश से पहली बार बाहर जाने का मौका मेरे सीरियल से ही मिला है. मैं जब पहली बार सिंगापुर गई थी तो वो मेरे लिए सबसे यादगार पल था."

दीपिका के मुताबिक़ देश से बाहर शूटिंग करने का फ़ैसला क्रिएटिव टीम का होता है लेकिन वो कलाकारों के लिए भी बेहतर इसलिए होता है क्योंकि एक ही लोकेशन में शूटिंग से वे बोर हो जाते हैं.

क्या होता है फ़ायदा

क्या निर्माताओं को विदेशी लोकेशन पर शूट करने का कोई फ़ायदा होता है ?

चर्चित डेली सोप ‘साथ निभाना साथिया’ के मुख्य कलाकार मोहम्मद नाज़िम दावा करते हैं कि स्विटज़रलैंड में शूटिंग के बाद उनके सीरियल की टीआरपी 4.5 से बढ़कर 6 हो गई.

लेकिन विदेश में शूटिंग करने से फ़ायदा ही होता है, ऐसा सभी लोग नहीं मानते.

(टीवी में काम करने के लिए बरतनी पड़ती है सावधानी)

सब टीवी के मशहूर शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के भी कुछ एपिसोड की शूटिंग पेरिस और लंदन में हुई.

लेकिन चैनल के बिज़नेस हेड अनुज कपूर कहते हैं, “एक तो हमें विदेश में शूटिंग करने से किसी तरह की कोई सब्सिडी नहीं मिलती. साथ ही मैं नहीं मानता कि इससे शो की टीआरपी यानी लोकप्रियता भी बढ़ती है."

अनुज के अनुसार, “ये तो वही बात हो गई कि एक फ़िल्म की पूरी शूटिंग देश में हुई हो और एक गाना देश के बाहर शूट किया गया हो. तो क्या बॉक्स ऑफ़िस पर कोई फर्क पड़ता अगर वो गाना नहीं होता तो?”

बॉलीवुड से बड़ी टीवी इंडस्ट्री?

टीवी की ताक़त को सबसे पहले समझने वाले फ़िल्मी कलाकारों में से एक अमिताभ बच्चन जब हाल ही में अपने पहले टीवी फ़िक्शन शो ‘युद्ध’ के प्रचार पर आए तो उन्होंने कहा, "आप लोग अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते कि ये टीवी इंडस्ट्री कितनी बड़ी है. आज इसमें बहुत पैसा है. मेरी बात को अतिशयोक्ति ना समझें. टीवी इंडस्ट्री में फ़िल्म इंडस्ट्री से तीन गुना ज़्यादा पैसा है."

ज़ाहिर सी बात है टीवी में बहुत पैसा आ रहा है और सितारों को भी इसमें काम करना मुनाफ़े का सौदा लगने लगा है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ निर्माताओं का भी फ़ायदा कई गुना ज़्यादा बढ़ गया है. सबके लिए ‘विन-विन सिचुएशन’ यानी फ़ायदेमंद माध्यम हो गया है छोटा पर्दा.

तो इसी वजह से शो के निर्माता पैसा खर्च करने में भी कोताही नहीं बरतते.

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