उत्तर कोरियाः मौसम की ग़लत भविष्यवाणी पर नेता हुए नाराज

Updated at : 17 Jun 2014 11:34 AM (IST)
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उत्तर कोरियाः मौसम की ग़लत भविष्यवाणी पर नेता हुए नाराज

बीबीसी मॉनिटरिंग सेवा उत्तर कोरिया में मौसम की भविष्यवाणी करने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से आलोचना का शिकार होना पड़ा है. सरकारी अख़बार ‘रोडोंग सिनमुन’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन का कहना है कि हाईड्रो-मटीरियोलॉजिकल सर्विस के काम करने का तरीका ‘आधुनिक या वैज्ञानिक’ नहीं होने के कारण मौसम विभाग […]

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उत्तर कोरिया में मौसम की भविष्यवाणी करने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से आलोचना का शिकार होना पड़ा है.

सरकारी अख़बार ‘रोडोंग सिनमुन’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन का कहना है कि हाईड्रो-मटीरियोलॉजिकल सर्विस के काम करने का तरीका ‘आधुनिक या वैज्ञानिक’ नहीं होने के कारण मौसम विभाग ने कई ग़लत भविष्यवाणियां की हैं.

उत्तर कोरियाई नेता ने मौसम केंद्र पर किए गए तथाकथित ‘क्षेत्रीय मार्गदर्शन दौरे’ के दौरान मौसम कर्मचारियों को जो डांट लगाई वह सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित हो गई.

अख़बार के मुताबिक़ उत्तर कोरियाई नेता का कहना है कि मौसम विभाग के कर्मचारियों को अपना काम में व्यापक सुधार लाना होगा, क्योंकि ख़राब मौसम के चलते आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से लोगों के जान-माल को बचाने के लिए सटीक भविष्यवाणी बेहद ज़रूरी है.

सूखे या तूफान का असर

‘मार्गदर्शन दौरे’ वो दौरा है जिसमें उत्तर कोरियाई नेता क़ारखाने, सैन्य ठिकानों या दफ्तरों में अपनी सलाह देने जाते हैं. इस तरह के दौरों में नेताओं की कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ अक्सर मुस्कुराती हुई तस्वीरें ही नजर आती हैं. ‘वाटर स्लाइड फैक्ट्री’ के ताजा दौरे में किम जोंग-उन ने कहा था कि कारखाने को देखकर लगता है कि उत्तर कोरिया में ‘कुछ भी असंभव’ नहीं है.

इन दौरों के बीच नेताओं की ओर से किसी तरह की आलोचना की ख़बर विरले ही सामने आती थी. पिछली बार ऐसा तब हुआ था जब मई 2012 में किम प्योंगयांग थिम पार्क की यात्रा से निराश हुए थे.

उत्तर कोरिया में खेती और पैदावार का मौसम अक्सर सूखे या तूफान की दया पर निर्भर करता है. मई में सरकारी मीडिया ने जानकारी दी थी कि देश भर में सूखे से गेहूं, जौ और आलू की कई हज़ार हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई.

फरवरी में आए अकाल को समाचार एजेंसी केसीएनए ने 50 सालों का सबसे भयंकर सूखा बताया था.

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