पाकिस्तानः मार डाला कराची हमले के 'मास्टरमाइंड' को

Updated at : 17 Jun 2014 11:34 AM (IST)
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पाकिस्तानः मार डाला कराची हमले के 'मास्टरमाइंड' को

पाकिस्तान की सेना ने अफ़ग़ानिस्तान सीमा से सटे उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ एक ‘बड़ा अभियान’ शुरू किया है. पाकिस्तान की फ़ौज ने एक बयान में कहा है कि शनिवार देर रात से शुरू हुई हवाई कार्रवाई में चरमपंथियों के आठ ठिकाने तबाह हुए है और 105 चरमपंथी हमले के शिकार हुए हैं. […]

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पाकिस्तान की सेना ने अफ़ग़ानिस्तान सीमा से सटे उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ एक ‘बड़ा अभियान’ शुरू किया है. पाकिस्तान की फ़ौज ने एक बयान में कहा है कि शनिवार देर रात से शुरू हुई हवाई कार्रवाई में चरमपंथियों के आठ ठिकाने तबाह हुए है और 105 चरमपंथी हमले के शिकार हुए हैं.

चरमपंथियों का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में लड़ाकू विमानों से हमलों के कई घंटे बाद यह कार्रवाई की गई.

सेना के बयान में कहा गया है कि मारे जाने वालों में ज़्यादातर लड़ाके उज़्बेक हैं.

‘हमलों का मास्टरमाइंड’

हाल ही में कराची एयरपोर्ट पर हुए चरमपंथी हमले के बाद सुरक्षाबल के एक अधिकारी ने दावा किया था कि हमलावर देखने में उज़्बेक लग रहे थे.

पाकिस्तानी फ़ौज ने कहा है कि हवाई कार्रवाई मे मारे जाने वालों में अबु अब्दुल रहमान अल मानी नाम के उज़्बेक भी शामिल थे जो कराची हमलों के मास्टरमाइंड थे.

उनका कहना है कि इलाक़े का दूसरे क्षेत्रों में संपर्क को रोक दिया गया है और चरमपंथी ठिकानों को सेना ने घेरे में ले रखा है. ऐसा समझा जाता है कि लगभग 4000 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में उन चरमपंथियों ने भी पनाह ले रखी है जो विदेशी नागरिक हैं.

बीबीसी के वैश्विक मामलों के संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि उत्तरी वज़ीरिस्तान पाकिस्तान का वो क्षेत्र है जहां आज तक एक बड़ी सैनिक कार्रवाई नहीं हुई है.

उन्होंने कहा कि अमरीका पाकिस्तान को पहले भी कहता रहा है कि वो यहां हमला करे लेकिन पाकिस्तान हुकूमत को डर था कि कहीं इसका बदला चरमपंथी दूसरे क्षेत्रों पर हमले कर के न लें.

‘हमले का बदला’

ताज़ा हमलों के बाद भी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता शहीदुल्लाह शाहिद ने कहा है कि वो हमले का बदला लेंगे.

कराची हमले की ज़िम्मेदारी भी तालिबान ने ली थी और इसे अपने नेता हकीमुल्ला मेहसूद की मौत का बदला बताया था.

मुल्क में नवाज़ शरीफ़ की सरकार के आने के बाद तालिबान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन इसमें किसी तरह की सफलता हासिल नहीं हुई.

कराची हमले के बाद तो ये बिल्कुल साफ़ हो गया था कि अब आगे किसी तरह की कोई बातचीत होगी भी नहीं.

बीबीसी संवाददाता आसिफ़ फ़ारूकी का कहना है कि हुकूमत इस हमले की तैयारी में कुछ दिनों से मशगूल था और पूरी रणनीति तीन स्तर पर तैयार की गई थी – चरमपंथी समूहों में फूट डालना, विपक्ष को भरोसे में लेना और देश के दूसरे क्षेत्र को बदले की किसी चरमपंथी कार्रवाई से महफ़ूज रखना.

‘घर छोड़ने को मजबूर’

सरकार ने पहली रणनीति के तहत फजलुल्लाह गुट को दूसरों से अलग-थलग कर दिया है.

हालांकि पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने कहा है कि उससे किसी तरह का कोई विचार विमर्श नहीं किया गया था.

एक विशेषज्ञ ने बीबीसी उर्दू से कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान से मिलकर सीमा को सील करवा दिया है और साथ ही ये भी कहा है कि दूसरी तरफ़ नुरूस्तान सूबे में मौजूद लड़ाकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो.

इधर क्षेत्र में निवास करने वाले कम से कम पैंतीस हज़ार परिवार सैन्य अभियान की वजह से घर बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं.

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