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कड़ाके की ठंड को दूर भगाये लज्जतदार गर्मागर्म सूप

Updated at : 18 Nov 2018 5:56 AM (IST)
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कड़ाके की ठंड को दूर भगाये लज्जतदार गर्मागर्म सूप

कड़ाके की ठंड को दूर भगाने के लिए भाप उगलते सूप के प्याले से बेहतर साधन तो कुछ और हो ही नहीं सकता है. इसलिए सर्दियों में सूप का पीना-पिलाना आम हो चला है. सूप और उसके विभिन्न प्रकारों के बारे में बता रहे हैं व्यंजनों के माहिर प्रोफेसर पुष्पेश पंत… जाड़े के मौसम में […]

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कड़ाके की ठंड को दूर भगाने के लिए भाप उगलते सूप के प्याले से बेहतर साधन तो कुछ और हो ही नहीं सकता है. इसलिए सर्दियों में सूप का पीना-पिलाना आम हो चला है. सूप और उसके विभिन्न प्रकारों के बारे में बता रहे हैं व्यंजनों के माहिर प्रोफेसर पुष्पेश पंत…
जाड़े के मौसम में गर्मागर्म भोजन और पेय बहुत अच्छे लगते हैं. पारंपरिक भारतीय खान-पान में सूप या शोरबे का विशेष स्थान नहीं रहा है, पर हाल के वर्षों में घर से बाहर रेस्तरां में खाना शुरू करने के पहले सूप मंगाने का चलन बढ़ा है. अन्यथा शोरबा बीमारों या बूढ़ों को ही पौष्टिक पथ्य के रूप में पिलाया जाता रहा है. पंजाब में बुजुर्ग लोग गठिया-बात की पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए घंटों तक उबाल कर खरोड़ों का सूप पीते थे.
शाकाहारी लोगों के लिए टमाटर, पालक, खुंब और बादाम का शोरबा या स्वीट कॉर्न अथवा तीखा हॉट एंड सावर सूप लोकप्रिय हैं. इनमें बाद वाले दो चीनी रसोई की देन हैं. वहीं से ‘मांचाओ’ और ‘वौंटौन ताली मीन’ भी भारत पहुंचे. इनके मांसाहारी संस्करण भी उपलब्ध हैं.
रूस, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में संभवत: मौसम के कारण सूप हमारे खाने का अभिन्न अंग बने हैं. रूसी सूप ‘बॉर्श’ को स्वादिष्ट संपूर्ण खुराक माना जाता है. जापान में सोयाबीन के पनीर और सोया सॉस से तैयार किया जानेवाला ‘मीसो सूप’ सबसे अधिक लोकप्रिय है.
वास्तव में सूपों को दो वर्गों में रखा जा सकता है- पतले वाले कौनसौम सूप और गाढ़े क्रीम वाले सूप. सबसे गाढ़े दलियानुमा सूप ‘चाउडर’ कहलाते हैं. इन्हें आम तौर पर समुद्री जीवों से तैयार करते हैं.
भारत में अंग्रेजी राज के दौरान ‘मुलिंगतौनी’ सूप ईजाद किया गया, जिसके नाम से ही यह सुराग मिलता है कि इसमें काली मिर्च और इमली के पानी का प्रयोग होता है. चावल के कुछ दाने भी इसमें तैरते हैं. कुछ समय पहले तक ‘फ्रेंच ओनियन सूप’ भी लोकप्रिय था, जिसमें डबलरोटी और तली हुई प्याज का स्वाद एक-साथ लिया जा सकता था. अब भी कहीं-कहीं यह चलन में है.
थाई खान-पान में सूप प्रमुख स्थान पाते हैं, हालांकि इन्हें खाने के शुरू में नहीं, बल्कि साथ-साथ परोसा जाता है. ‘टौम याम’ इनमें सबसे मशहूर है.
कुछ सूप मांस-मछली और सब्जियों से इतना समृद्ध होते हैं कि इन्हें आप संपूर्ण भोजन ही मान सकते हैं. नूडल्स और मांस तथा सब्जियों को नारियल के गाढ़े दूध में पेश करनेवाला ‘बर्मा कौ स्वे’ ऐसा ही सूप है.
बहरहाल कड़ाके की ठंड को दूर भगाने के लिए भाप उगलते सूप के प्याले से बेहतर साधन तो कुछ और हो ही नहीं सकता है. शादी-बारात की दावतों में यह आइटम खास काम का रहता है. मादक शराब के जाम बारातियों को आपे से बाहर कर सकते हैं.
वहीं सूप का दौर निरापद है और अगर मुख्य खाना परोसने में देर-दार हो, तो कुछ समय बिताने में यह मददगार भी हो सकता है. दक्षिण भारत में खासकर तामिलनाडु में रसम को आप ‘पनीला सूप’ कह सकते हैं, पर इसे रेस्त्रां में ही पापड़ के साथ अलग से दिया जाने लगा है. घरों पर इसे चावल के साथ ही खाया जाता है.
यों भोजप्रबंध में महाकवि कालिदास के नाम से एक पंक्ति दर्ज है, जिसमें याचक ब्राह्मण की कवित्वरस विहीन रचना का रूपांतर चंद्रमा से धवल भैंस के दही से कर दिया गया था. आरंभ में सिर्फ ‘भोजनम् देहि राजेंद्र घृत सूप समन्वितम्’ का स्वर मुखर किया गया था. पर इस सूप को पश्चिमी सूप का पर्याय मानना ठीक नहीं.
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