बिहार में क्यों रद्द हुआ दारोगा भर्ती का परिणाम

Updated at : 01 Nov 2018 8:26 AM (IST)
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बिहार में क्यों रद्द हुआ दारोगा भर्ती का परिणाम

<p>बिहार में दारोगा के पद के लिए हुई भर्ती की परीक्षा का परिणाम पटना हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है. </p><p>बिहार पुलिस कर्मचारी आयोग ने लिखित परीक्षा के 12 दिन बाद ही परिणाम घोषित कर दिया था और शारीरिक परीक्षा शुरू हो गई थी. </p><p>इसी साल 22 जुलाई को हुई इस परीक्षा में 29 […]

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<p>बिहार में दारोगा के पद के लिए हुई भर्ती की परीक्षा का परिणाम पटना हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है. </p><p>बिहार पुलिस कर्मचारी आयोग ने लिखित परीक्षा के 12 दिन बाद ही परिणाम घोषित कर दिया था और शारीरिक परीक्षा शुरू हो गई थी. </p><p>इसी साल 22 जुलाई को हुई इस परीक्षा में 29 हज़ार से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे. अगस्त के पहले सप्ताह में ही इसका रिजलट भी जारी कर दिया था जिसमें क़रीब 10 हज़ार कैंडिडेट्स को सफल घोषित किया गया था. </p><p>बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पिछले साल नवंबर में दारोगा के 1,717 पदों पर बहाली का विज्ञापन निकाला था. उसी की भर्ती के लिए ये परीक्षा हुई थी.</p><p>नतीजे जारी किए जाने के बाद नाकाम रहे उम्मीदवारों ने परीक्षा में धांधली के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए थे. </p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-44610632">BBC पड़ताल: बिहार बोर्ड से क्यों निकलते हैं फ़र्ज़ी टॉपर</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45243254">बिहार लिंचिंग मामला: सेंट्रल यूनिवर्सिटी अनिश्चितकाल के लिए बंद</a></p><p>इन उम्मीदवारों की ओर से पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई करते हुए अदालत ने अब परीणाम रद्द कर दिए हैं. </p><p>जस्टिस शिवा जी पांडेय की अदालत ने सुनवाई दशहरे की छुट्टियों से पहले ही पूरी करके फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. </p><p><strong>मुख्य परीक्षा में क्रमांक</strong><strong> बदलने के आरोप</strong></p><p>रोहतास ज़िले के रहने वाले और पेशे से इंजीनियर विक्रांत उपाध्याय भी हाइ कोर्ट में रिट दायर करने वाले 195 याचिकाकर्ताओं में से एक हैं. </p><p>उन्होंने बीबीसी को बताया, ”प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहे उम्मीदवारों के क्रमांक मुख्य परीक्षा में बदल दिए गए. नतीजे जारी करने के पहले उत्तर और कट-ऑफ जारी नहीं किए गए.” </p><p>”मुख्य परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को ओएमआर शीट नहीं दी गई. इतनी अपारदर्शिता के बीच मुख्य परीक्षा का रिज़ल्ट जारी किया गया. इन सबके आधार पर हमने याचिका दायर की थी.”</p><p>वहीं आज के अदालत के फ़ैसले के बारे में उन्होंने बताया, ”आज के फ़ैसले में कोर्ट ने बीपीएससी को एंसर की जारी करने और उस पर कैंडिडेट्स को आपत्ति दर्ज करने को मौक़ा देने को कहा है. इसके बाद आरक्षण के प्रावधानों और पूरी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संशोधित परिणाम निकालने का आदेश दिया है. इसके लिए अदालत ने कोई समय सीमा तय नहीं की है.”</p><p>मुख्य परीक्षा रिजल्ट के विरोध में आंदोलन की अगुआई करने वालों में से पुनपुन यादव भी एक हैं. </p><p>उन्होंने आज के फैसले पर कहा, ”यह देश में सबसे तेज़ी से जारी किया गया रिजल्ट था. बीपीएससी ने बिजली की तेज़ी से रिजल्ट निकाला जो कि अनियमितताओं का पुलिंदा था. हमलोग कोर्ट के फ़ैसले से ख़ुश हैं.”</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> करें. आप हमें</strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi"> फ़ेसबुक</a><strong> और</strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi"> ट्विटर </a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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