BBC पड़ताल: भारत में बच्चा चोरी की अफ़वाह का पाकिस्तान कनेक्शन

Updated at : 28 Jun 2018 10:53 AM (IST)
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BBC पड़ताल: भारत में बच्चा चोरी की अफ़वाह का पाकिस्तान कनेक्शन

BBC25 साल के कालू राम को बेंगलुरू के इस फ़्लाइओवर के नीचे भीड़ ने बाँधकर इतना पीटा कि उनकी मौत हो गईबीते कुछ महीनों के दौरान भारत के अलग-अलग हिस्सों में बच्चा चोरी की अफ़वाहों के कारण कई दर्दनाक हत्याएं हुई हैं. इनमें सबसे ताज़ा और दर्दनाक हादसा बेंगलुरु का है जहाँ 25 साल के […]

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25 साल के कालू राम को बेंगलुरू के इस फ़्लाइओवर के नीचे भीड़ ने बाँधकर इतना पीटा कि उनकी मौत हो गई

बीते कुछ महीनों के दौरान भारत के अलग-अलग हिस्सों में बच्चा चोरी की अफ़वाहों के कारण कई दर्दनाक हत्याएं हुई हैं.

इनमें सबसे ताज़ा और दर्दनाक हादसा बेंगलुरु का है जहाँ 25 साल के कालू राम को भीड़ ने बाँधकर इतना पीटा कि उनकी मौत हो गई.

भीड़ में शामिल लोगों को ये शक़ था कि कालू राम बच्चा चोरी करने वाले किसी कथित गैंग के लिए काम करते थे.

कालू राम की हत्या पर बेंगलुरु पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, "लोग एक फ़र्ज़ी व्हॉट्सऐप वीडियो को लेकर नाराज़ थे. इस वीडियो में दो बाइक सवार लोग एक बच्चे को चोरी करते दिखाई देते हैं. इस वीडियो को लेकर इलाक़े में काफ़ी गुस्सा है."

अब पता चला है कि भारत में वायरल हुआ ये फ़ेक वीडियो दरअसल पाकिस्तान के कराची शहर का है.

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बच्चों की हिफ़ाज़त के लिए बनाया गया था ये वीडियो

ये पूरा वीडियो देखें तो साफ़ हो जाता है कि ये किडनैपिंग का नहीं बल्कि बच्चों की हिफ़ाज़त को बढ़ावा देने के लिए तैयार किये गए एक सोशल कैंपेन का वीडियो है.

सोशल मीडिया पर इस वीडियो का आख़िरी हिस्सा हटाकर इसे वायरल किया गया.

वीडियो के आख़िर में ये संदेश दिया गया था कि कराची में घर से बाहर खेलने निकले बच्चों का चोरी होना बेहद आसान है, इसलिए उनकी हिफ़ाज़त करें.

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वीडियो बनाने वाली कराची की कंपनी क्या कहती है?

इस वीडियो को कराची एडवरटाइज़िंग नाम की एक कंपनी ने तैयार किया था. वीडियो के निर्माता हैरान हैं कि भारत में कैसे इस वीडियो का ग़लत इस्तेमाल किया गया.

कंपनी से जुड़े असरार आलम कहते हैं, "ये बहुत हिला देने वाली ख़बर है. मैं कैसा महसूस कर रहा हूं ये बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. मैं उस शख़्स का चेहरा देखना चाहता हूं जिसने इस ख़राब मक़सद के लिए हमारा वीडियो इस्तेमाल किया."

आलम कहते हैं कि वो इस वीडियो के ज़रिये लोगों में जागरूकता फैलाने चाहते थे.

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असरार आलम

"हमने जागरूकता के लिए बनाया वीडियो"

उनके साथी मोहम्मद अली ने बताया, "हमने समाज को जागरूक करने के लिए ये वीडियो बनाया था. लेकिन लोग इसे ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल कर रहे हैं. लोग मर रहे हैं. इसके ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. भारत में हुई घटनाओं ने हमारी कोशिश को नाकाम कर दिया है."

भारत में ऐसे ही कई अन्य फ़ेक वीडियो सर्कुलेट किए गए हैं. इनके कारण फैली अफ़वाहों की वजह से बीते कुछ महीनों में आठ लोगों को भारत के अलग-अलग हिस्सों में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला.

लोगों पर इन वीडियो का क्या होता है असर?

सोशल मीडिया पर दिखी ये वीडियो लोगों को कितनी सच्ची लगती हैं? और वो वीडियो देखने के बाद कैसे रिएक्ट करते हैं? ये जानने-समझने के लिए बीबीसी संवाददाता डेन जॉनसन बेंगलुरु पहुँचे.

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बेंगलुरु आधुनिक और विविधताओं वाला शहर माना जाता है, जहाँ आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने अपने पाँव जमाये हैं.

लेकिन एक फ़ेक वीडियो की वजह से लोगों ने कालू राम को सड़क पर घसीटते हुए पीटा और अस्पताल पहुँचने से पहले उनकी मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि कालू रोज़गार की तलाश में इस शहर आए थे.

बीबीसी से बातचीत में कुछ स्थानीय लोगों ने माना कि ऐसे फ़ेक वीडियो लोगों में भय पैदा कर रहे हैं. उन्हें वीडियो के सच्चा या झूठा होने से फ़र्क नहीं पड़ता. ऐसे वीडियो देखकर उन्हें सिर्फ़ अनजान लोगों पर शक़ होता है.

कुछ लोगों ने बताया कि व्हॉट्स ऐप पर वीडियो के साथ जो संदेश लिखा था, वो था कि ‘बेंगलुरु शहर में क़रीब 200 लोग बच्चा चोरी करने के लिए घुस आये हैं’.

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अफ़वाह और हिंसा की ख़बरें

स्थानीय मीडिया ने इससे जुड़ी ख़बरों में ये दावा किया कि 5,000 से ज़्यादा बच्चे इन कथित बच्चा चोरों के निशाने पर हैं. साथ ही अभिभावकों को चेतावनी दी गई कि वो सतर्क रहें. इससे स्थिति और नाज़ुक हो गई.

बीते कुछ दिनों में तमिलनाडु और गुजरात के सूरत शहर से भी बच्चा चोरी की अफ़वाह को लेकर हिंसा की ख़बरें आई हैं.

बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर टी सुनील कुमार ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ऐसी अफ़वाहों को रोकने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है.

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उन्होंने कहा, "हम सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी वीडियो की जानकारी दे रहे हैं. पुलिस की कई गाड़ियाँ मोहल्लों में जाकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं. हमारी सलाह है कि मीडिया भी इनसे जुड़ी ख़बरें दिखाते वक़्त इनकी पुष्टि ज़रूर करें."

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