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शरीफ को पार्टी का नेतृत्व करने से रोकने की याचिका को इस्लामाबाद हाइकोर्ट ने स्वीकारा

Updated at : 25 Oct 2017 4:46 PM (IST)
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शरीफ को पार्टी का नेतृत्व करने से रोकने की याचिका को इस्लामाबाद हाइकोर्ट ने स्वीकारा

इस्लामाबाद : एक पाकिस्तानी हाइकोर्ट ने देश के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएलएल-एन) पार्टी का फिर से नेतृत्व करने से रोकने संबंधी एक याचिका को स्वीकार कर लिया है. पनामा पेपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई के अयोग्य करार देने के फैसले के बाद 67 वर्षीय शरीफ ने […]

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इस्लामाबाद : एक पाकिस्तानी हाइकोर्ट ने देश के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएलएल-एन) पार्टी का फिर से नेतृत्व करने से रोकने संबंधी एक याचिका को स्वीकार कर लिया है. पनामा पेपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई के अयोग्य करार देने के फैसले के बाद 67 वर्षीय शरीफ ने अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्हें इस माह की शुरुआत में फिर से पार्टी प्रमुख चुना गया है.

इस्लामाबाद हाइकोर्ट (आईएचसी) के न्यायाधीश आमिर फारुक ने मंगलवारको याचिका स्वीकार करके शरीफ एवं अन्य को नोटिस जारी किया. इसी याचिकाकर्ता ने चुनाव सुधार कानून (ईआरए) 2017 को चुनौती दी थी और हालिया याचिका के जरिये उसने कहा कि एक अयोग्य व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व करने की अनुमति देना संविधान की भावना के विपरीत है.

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि शरीफ को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जरिये नेशनल असेम्बली के सदस्य के तौर पर अयोग्य करार दिया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि राजनीतिक दल अध्यादेश (पीपीओ) 2002 के अनुच्छेद पांच के अनुसार कोई अयोग्य व्यक्ति किसी राजनीतिक दल की किसी भी बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता. उसने कहा कि अयोग्य व्यक्ति न तो पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है और न ही किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व कर सकता है. ईआरए 2017 संविधान की मूल भावना के खिलाफ है क्योंकि इस्लामी शरियत के आधार पर प्रतिबंधित किसी भी बात के खिलाफ कोई कानून पारित नहीं किया जा सकता. उसने कहा कि इसके अलावा, एक अयोग्य व्यक्ति को पार्टी के नेतृत्व की अनुमति देने के संदर्भ में यह ईआरए कुरान और सुन्नत का भी उल्लघंन है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि कोई भी कानून किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि लोगों की वाजिब जरुरतों के मद्देनजर तैयार किया जाना चाहिए. इससे पहले, संसद ने इस माह चुनाव सुधार कानून (ईआरए)2017 पारित किया था ताकि शरीफ को फिर से पीएमएल-एल अध्यक्ष बनाये जाने का रास्ता साफ हो सके.

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