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जवाबदेही अदालत ने नवाज शरीफ और उनके बच्चों को किया तलब

Updated at : 13 Sep 2017 10:12 PM (IST)
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जवाबदेही अदालत ने नवाज शरीफ और उनके बच्चों को किया तलब

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके बच्चों को भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने 19 सितंबर को तलब किया है. यह मामला ब्रिटेन में शरीफ परिवार की कंपनी से जुड़ा है. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) ने पिछले सप्ताह चार मामलों में इन लोगों को तलब किया था. ये मामले शरीफ, उनके परिवार के […]

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके बच्चों को भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने 19 सितंबर को तलब किया है. यह मामला ब्रिटेन में शरीफ परिवार की कंपनी से जुड़ा है. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) ने पिछले सप्ताह चार मामलों में इन लोगों को तलब किया था. ये मामले शरीफ, उनके परिवार के सदस्यों और वित्त मंत्री इसहाक डार के खिलाफ चल रहे हैं.

जवाबदेही अदालत ने शरीफ और उनकी बेटी मरियम एवं बेटों हुसैन और हसन को आदेश दिया कि वे 19 सितंबर को उसके समक्ष उपस्थित हों. ब्रिटेन में शरीफ परिवार की कंपनी फ्लैगशिप इनवेस्टमेंट लिमिटेड से जुड़े मामले में इन लोगों को तलब किया गया है. इससे पहले अदालत ने कई त्रुटियों की वजह से मामलों को लौटा दिया था, लेकिन नैब ने इन गलतियों को सुधारा और मामले फिर से दायर कराये.

उधर, सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने शरीफ और अन्य की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी. इन लोगों ने पनामा पेपर्स के मामले में आये फैसले को चुनौती दी है. पीठ के वरिष्ठ न्यायधीश आसिफ सईद खोसा ने कहा कि पांच न्यायाधीशोंवाली पीठ ने पनामा पेपर्स मामले में शरीफ को अयोग्य ठहराने का फैसला सर्वसम्मति से सुनाया था. खोसा ने स्पष्ट किया कि पनामा पेपर्स मामले में सभी पांच न्यायाधीशों ने अंतिम फैसले को अनुमोदित किया था.

यह असमंजस पैदा हो गया था कि अदालत ने शरीफ के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में दो निर्णय दिये थे जिसमें 20 अप्रैल का फैसला अल्पमत का था और 28 जुलाईवाला फैसला तीन सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से सुनाया था. न्यायमूर्ति खोसा ने कहा कि शुरुआत में ही पांचों न्यायाधीश शरीफ को अयोग्य ठहराये जाने पर सहमत थे, लेकिन तीन न्यायाधीश कुछ बिंदुओं को स्पष्ट करने के लिए आगे जांच चाहते थे. उन्होंने शरीफ के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि 20 अप्रैल के फैसले के बाद दो न्यायाधीश 28 जुलाई के फैसले पर हस्ताक्षर नहीं कर सके थे.

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