'गंगा की गाद' से बदलेगी किसानों की किस्मत! वाराणसी में 2000 ट्रक उपजाऊ मिट्टी का होगा खेतों में छिड़काव
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 Nov 2021 8:59 AM
Varanasi News: गंगा की गाद वाली लगभग 2 हजार ट्रक उपजाऊ मिट्टी यहां पर जमा होगी, जिसे किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खनन विभाग को देने की तैयारी चल रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 2016 में अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर साफ सफाई की शुरुआत की थी.
वाराणसी का अस्सी घाट इस वक्त तीन-चौथाई रूप से पानी और मिट्टी (गाद) से ढंक चुका है, उसे वापस पूराने रूप में लाने के लिए नमामि गंगे की टीम ने 5 जेसीबी से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया है. इन मीट्टी के जमा होने से पहले के 9 प्लेटफार्म में से 3 ही वर्तमान समय में दिखाई देते हैं, अब इन घाटों से मिट्टी हटने के बाद से वापस से सभी प्लेटफार्म नज़र आने लगेंगे. इसके हटने से जल्द ही काशी को फिर से अस्सी घाट का पुराना विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा.
वाराणसी के अस्सी घाट पर नमामि गंगे की टीम ने 5 जेसीबी से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया है. इन मिट्टी और गाद से दबने की वजह से 9 प्लेटफार्म में से केवल 3 ही नजर आते थे. बाकी सब 10 साल से ज्यादा समय से मिट्टी में दबे हुए हैं. नमामि गंगे ने इस घाट के साफ-सफाई की जिम्मेदारी विशाल प्रोटेक्शन कंपनी को दी है. यह कंपनी गंगा के पानी और घाट के बीच की दूरी को खत्म कर इनपर जमा गाद को हटाने का कार्य कर रही हैं.
गाद इकठ्ठा होने से गंदगी बढ़ जाती है, जोकि गंगा के लिए ठीक नहीं. करीब 30 फीट से भी ज्यादा खोदाई करने के बाद घाटों का स्वरूप उभर कर आएगा. सबसे पहले जेसीबी से मिट्टी काटकर इस घोल को गंगा में बहाया जा रहा है. इस पर गंगा विज्ञानियों ने आपत्ति जताई तो फिर वाराणसी के डीएम ने इस मिट्टी को किसानों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है.
लगभग 2 हजार ट्रक उपजाऊ मिट्टी यहां पर जमा होगी, जिसे किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खनन विभाग को देने की तैयारी चल रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 2016 में अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर साफ सफाई की शुरुआत की थी. उसके बाद धीरे धीरे अस्सी घाट के कायाकल्प में परिवर्तन आना शुरू हुआ.
कई समाजसेवी संस्थाओं ने सफाई अभियान के तहत यहां काम किया है. लेकिन इसबार नमामि गंगे के इस10 दिन बाद सफाई अभियान के आने वाले कायाकल्प को लेकर काशीवासी बहुत उम्मीदें लगाकर बैठे हैं कि शायद अब फिर से उन्हें अस्सी घाट का पुराना रूप देखने को मिलेगा.
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रिपोर्ट : विपिन सिंह
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