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उपराष्ट्रपति की टिप्पणी पर टीएमसी सांसद का पलटवार, पश्चिम बंगाल पर कुछ कहना उनके पद के अनुरूप नहीं

Updated at : 13 Oct 2022 6:46 PM (IST)
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उपराष्ट्रपति की टिप्पणी पर टीएमसी सांसद का पलटवार, पश्चिम बंगाल पर कुछ कहना उनके पद के अनुरूप नहीं

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की और दावा किया कि इस तरह की टिप्पणियां उनके पद के अनुरूप नहीं हैं.

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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय (Saugata Roy) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar ) की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की और दावा किया कि इस तरह की टिप्पणियां उनके पद के अनुरूप नहीं हैं.उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले धनखड़ लगभग तीन वर्षों तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे और उस दौरान उनका कई मौकों पर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति और अन्य मुद्दों को लेकर ममता बनर्जी सरकार के साथ टकराव हुआ. टीएमसी के वरिष्ठ सांसद ने कहा, उनकी इस तरह की टिप्पणी करना गलत है और हमने तब भी उनका विरोध किया था जब धनखड़ राज्यपाल थे जैसा कि अब हम करते हैं.

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बंगाल में कानून का शासन नहीं

जगदीप धनखड़ ने बुधवार को नयी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान याद किया कि 2021 में चुनाव के बाद की कथित हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश पर गठित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक तथ्यान्वेषी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून का शासन नहीं, शासक का कानून है.जगदीप धनखड़ करीब तीन सालों तक पश्चिम बंगाल के गवर्नर थे और इस दौरान सीएम ममता बनर्जी से कई मुद्दों पर उनका टकराव हुआ था. यूनिवर्सिटी में वीसी नियुक्त करने से लेकर कानून व्यवस्था तक के मामलों में दोनों के बीच कई बार टकराव देखने को मिला था.

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भेदभाव नहीं होना चाहिए

इस मामले पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हमें लैंगिक समानता स्थापित करने की जरूरत है.सभी के पास समान अधिकार होने चाहिए. किसी के साथ भी भेद-भाव नहीं होना चाहिए. किसी को भी धर्म या परंपरा के नाम पर भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता है. इसके लिए यह बहुत ज्यादा जरुरी है कि यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड की दिशा में बढ़ जाए.संविधान का आर्टिकल 44 इसकी वकालत करता है. उन्होंने कई शहरों में पर्यावरण खराब होने को भी मानवाधिकार का उल्लंघन करारा दिया.

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