गलवान घाटी में शहीद हुए साहिबगंज के कुंदन ओझा के आश्रित को राज्य सरकार से मिले सिर्फ 10 लाख रुपये, नहीं मिली सरकारी नौकरी

jharkhand News (साहिबगंज) : भारत-चीन सीमा गलवान घाटी में शहीद हुए साहिबगंज जिले के मिर्जाचौकी डिहारि के लाल शहीद कुंदन कुमार ओझा आज ही के दिन यानी 15 जून, 2020 की देर रात चीनी सैनिकों से हुए हिंसक झड़प में शहीद हो गये थे. वहीं, 19 जून 2020 को शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर आते ही राज्य सरकार की ओर से कई घोषणाएं हुई थी. लेकिन, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की घोषणाएं धरी की धरी रह गयी है.
jharkhand News (साहिबगंज) : भारत-चीन सीमा गलवान घाटी में शहीद हुए साहिबगंज जिले के मिर्जाचौकी डिहारि के लाल शहीद कुंदन कुमार ओझा आज ही के दिन यानी 15 जून, 2020 की देर रात चीनी सैनिकों से हुए हिंसक झड़प में शहीद हो गये थे. वहीं, 19 जून 2020 को शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर आते ही राज्य सरकार की ओर से कई घोषणाएं हुई थी. लेकिन, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की घोषणाएं धरी की धरी रह गयी है.
शहीद कुंदन ओझा बिहार रेजिमेंट के जवान थे. 15 जून, 2020 की देर रात्री को गलवान घाटी में चीनी सेना से हुई हिंसक झड़प में कुंदन ओझा शहीद हो गये थे. परिजन 16 जून, 2021 को पहली बरसी मनायेगा. पिता रविशंकर ओझा को बेटे के शहादत पर गर्व है और आंखों में आंसू भी है.
शहीद कुंदन ओझा के पिता रविशंकर ओझा ने बताया कि केंद्र सरकार और विभाग की और से सभी कुछ मिल गया है. लेकिन, राज्य सरकार की ओर से जो भी घोषणाएं की गयी थी, उसमें मात्र 10 लाख रुपया ही मिला, जो तत्कालीन डीसी वरुण रंजन ने दिया था. उसके बाद कुछ भी राज्य सरकार की ओर से नहीं मिला. वहीं, बिहार सरकार ने अपने प्रदेश के शहीद हुए जवानों के लिए जो भी घोषणा किया था, सभी एक वर्ष से पहले ही आश्रितों को दे दिया गया.
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गलवान घाटी में शहीद हुए कुंदन ओझा की पत्नी नम्रता ओझा ने बताया कि सेना की तरफ से ओर केंद्र सरकार की ओर से सभी कुछ मिल गया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक न ही आश्रित को नौकरी मिली है और न ही पेट्रोल पंप. वही, राज्य सरकार रहने के लिए घर भी देने की घोषणा की थी, लेकिन इस पर कोई अमल नहीं हुआ. सिर्फ 10 लाख रुपये का चेक राज्य सरकार की ओर से मिला है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जो भी घोषणा किये गये थे, उसमें कुछ भी नहीं मिला है. शहीद कुंदन ओझा को एक वर्ष की पुत्री है जिसे घर में सब प्यार से लालू कहकर पुकारते हैं.
शहीद कुंदन ओझा शहीद होने से 22 दिन पहले एक पुत्री के पिता बने थे. लेकिन, बच्ची का चेहरा ना पिता देख पाये और ना ही पुत्री अपने पिता का चेहरा देख पायी. 22 दिन की पुत्री के सर से पिता का ही साया उठ गया था. कुंदन अपने घर में सबसे होनहार लड़का था. कुंदन सभी के साथ धुल-मिलकर रहता था. कुंदन अपने परिवार वालों से बातचीत में कहा था कि हम जल्द अपने पुत्री को देखने घर आयेंगे. लेकिन, होनी को कौन टाल सकता है. किसे पता था कि कुंदन जब अपना घर आयेंगे, तो तिरंगे से लिपटे हुए आयेंगे. अब शहीद कुंदन ओझा की बेटी अब एक वर्ष की हो गयी है.
गलवान घाटी में शहीद हुए शहीद कुंदन ओझा का 16 जून को पहला बरसी है. इस अवसर पर परिजनों ने जिले के डीसी, एसपी, विधायक, सांसद, विधायक प्रतिनिधि सभी को आमंत्रित किया है. वहीं, शहीद को सभी श्रद्धांजलि देंगे.
Posted By : Samir Ranjan.
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