कोरोना के खौफ की तपिश पर गर्मी के ठंडे छींटे, अप्रैल में बढ़ा पारा
Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Apr 2020 2:20 AM
लखनऊ : अप्रैल महीने की पहली तारीख को 36.67 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुए तापमान ने बेशक धूप में चिलचिलाहट बढ़ायी, पर कोरोना के खौफ से परेशान लोगों को सूरज के तेवर ने दिमागी ठंडक का अहसास कराया. धारणागत ही सही, लोग मान रहे हैं कि पारा चढ़ने के साथ कोरोना के तेवर ढीले पड़ जायेंगे. […]
लखनऊ : अप्रैल महीने की पहली तारीख को 36.67 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुए तापमान ने बेशक धूप में चिलचिलाहट बढ़ायी, पर कोरोना के खौफ से परेशान लोगों को सूरज के तेवर ने दिमागी ठंडक का अहसास कराया. धारणागत ही सही, लोग मान रहे हैं कि पारा चढ़ने के साथ कोरोना के तेवर ढीले पड़ जायेंगे. वायरोलॉजिस्ट भी उम्मीद जता रहे हैं कि मौसम में तपिश बढ़ने के साथ कोराना वायरस का प्रसार घटने लगेगा.अप्रैल की शुरुआत के साथ ही राजधानी सहित उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने लगा है. बुधवार को लखनऊ में तापमान 36.67 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. यह मंगलवार की अपेक्षा दो डिग्री ज्यादा रहा. यानी महज 24 घंटे में तापमान में दो डिग्री का इजाफा हो गया.
यूं तो बढ़ता तापमान लोगों को परेशान करता है लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है कारण है कि देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है, वहीं वैज्ञानिकों का यह मानना कि बढ़ता तापमान कोरोना वायरस से के विरुद्ध जंग में मददगार साबित होगा, बड़ी राहत दे रहा है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के जीन वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध लोगों को तसल्ली दे रहे हैं. दोनों वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध के अनुसार कोरोना वायरस बढ़ते तापमान में हताश होने लगता है. प्रयोगशाला में देखा गया कि तापमान शून्य से 23 डिग्री पहुंचने पर कोरोना वायरस की संख्या घटकर आधी रह गयी. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि वायरस के लिए शून्य से आठ डिग्री का तापमान वायरस के अस्तित्व के लिए आदर्श साबित होता है.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन के निदेशक प्रोफेसर देबप्रसाद चट्टोपाध्याय का भी मानना है कि अप्रैल-मई में जब तापमान में बढ़ोतरी हो जायेगी, कोरोना का असर काफी हद तक कम होने की उम्मीद है. मई में जब तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंचता है और लू हलकान कर देती है, तब कोरोना के प्रसार पर ब्रेक लगने की उम्मीद है.तापमान बढ़ने पर वायरस का सतह पर टिकना मुश्किल होगावैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के संक्रमण की बड़ी वजह किसी सतह पर संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट गिरना और उससे स्वस्थ व्यक्ति का संक्रमित होना है.
उम्मीद है कि बढ़ता तापमान गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा वजह यह है आसमान से जब अप्रैल-मई में आग बरसती है और तापमान 40 से 50 डिग्री के बीच पहुंच जाता है, तब किसी सतह पर वायरस का अधिक समय टिक पाना बहुत मुश्किल है. ऐसे में बढ़ता तापमान वायरस को हराने में मददगार साबित हो सकता है. वैज्ञानिकों की माने तो यह गर्मी हमारे लिए राहत की खबर लायेगी.इस तरह बढ़ रहा तापमान
दिनांक-तापमान
1 अप्रैल-36.6 डिग्री
31 मार्च-34.4 डिग्री
30 मार्च-32.8 डिग्री
29 मार्च-32.4 डिग्री
28 मार्च-31.6 डिग्री
27 मार्च-24.9 डिग्री
(लखनऊ का अधिकतम तापमान)
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By Pritish Sahay
प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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