भारतीय ड्राइवरों के लिए डैशकैम क्यों है जरूरी? जानिए ये कैसे बचाता है आपको मुश्किलों से

Published by : Ankit Anand Updated At : 07 Jun 2026 6:46 PM

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कार डैशकैम (Photo: GoMechanic)

Car Dashcams: भारत में डैशकैम अब सिर्फ एक एक्स्ट्रा एक्सेसरीज नहीं, बल्कि ड्राइविंग सेफ्टी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. यह सड़क की हर घटना रिकॉर्ड करके झगड़े, फर्जी चालान और बीमा विवाद में पक्का सबूत देता है. आइए इसे डिटेल में समझते हैं.

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भारत में ड्राइविंग हमेशा से थोड़ी अनप्रेडिक्टेबल रही है. ऑटोमेटेड ट्रैफिक सिस्टम, फर्जी एक्सीडेंट स्कैम और इंश्योरेंस से जुड़े विवाद बढ़ने के साथ ही डैशकैम की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा हो गई है. अब ये सिर्फ कार के शौकीनों या कंटेंट बनाने वालों का गैजेट नहीं रह गया है, बल्कि डेली ड्राइविंग में एक तरह की सेफ्टी लेयर बन गया है. चाहे कोई ट्रैफिक में झगड़ा हो, गलत चालान लग जाए या पार्किंग में गाड़ी को नुकसान पहुंच जाए, वीडियो सबूत होने पर मामला जल्दी और साफ तरीके से सुलझ जाता है.

डैशकैम कैसे काम करता है?

डैशकैम एक छोटा सा कैमरा होता है जिसे कार की विंडस्क्रीन या पीछे के शीशे पर लगाया जाता है. यह ड्राइविंग के दौरान लगातार सड़क की रिकॉर्डिंग करता रहता है, ताकि हर मूवमेंट का वीडियो सेफ रहे. ज्यादातर डैशकैम में लूप रिकॉर्डिंग फीचर होता है. यानी जब मेमोरी भर जाती है तो पुरानी वीडियो अपने आप डिलीट होकर नई रिकॉर्डिंग से रिप्लेस हो जाती है.

लेकिन अगर अचानक ब्रेक लग जाए, टक्कर हो जाए या तेज झटका लगे, तो इसका G-सेंसर एक्टिव हो जाता है और उस खास वीडियो को लॉक कर देता है, ताकि वो गलती से डिलीट न हो सके. आजकल के मॉडर्न डैशकैम में GPS ट्रैकिंग, मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी, पार्किंग मॉनिटरिंग और रियर कैमरा जैसे एडवांस फीचर्स भी मिलते हैं.

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डैशकैम क्यों जरूरी है?

सड़क पर झगड़े के दौरान सेफ्टी

सड़क पर छोटी-मोटी टक्कर या लेन कटिंग जैसी घटनाएं अक्सर झगड़े में बदल जाती हैं. कई बार बिना सही सबूत के ही दोष दूसरे ड्राइवर पर डाल दिया जाता है. ऐसे समय में डैशकैम का वीडियो साफ-साफ दिखा देता है कि असल में हुआ क्या था. इससे बेवजह की बहस कम होती है और पुलिस रिपोर्टिंग भी काफी आसान जाती है.

गलत ई-चालान को चुनौती देना

भारत के कई शहरों में अब ऑटोमेटेड ट्रैफिक कैमरे तेजी से लगाए जा रहे हैं. लेकिन ये हमेशा 100% सही नहीं होते. कई बार स्पीड गलत रिकॉर्ड हो जाती है, नंबर प्लेट पहचान में गलती हो जाती है या फिर स्टॉप लाइन को लेकर भी एरर आ जाता है. ऐसे में GPS वाला डैशकैम काफी काम आता है. क्योंकि यह आपकी स्पीड, लोकेशन और सिग्नल की स्थिति का पूरा रिकॉर्ड रखता है. अगर कभी गलत e-challan कट जाए, तो यह फुटेज आपके लिए मजबूत सबूत बन सकता है.

पार्किंग में निगरानी और चोरी की कोशिशें

आजकल कई मॉडर्न डैशकैम में पार्किंग सर्विलांस मोड भी मिलता है. मतलब अगर आपकी गाड़ी पार्क है और कोई उसे टक्कर मार दे या चोरी की कोशिश करे, तो कैमरा खुद ही एक्टिव होकर आसपास की पूरी रिकॉर्डिंग शुरू कर देता है. ऐसे में हिट-एंड-रन या चोरी जैसी घटनाओं में आपके पास साफ सबूत होता है, जिससे नुकसान का पता लगाना आसान हो जाता है.

इंश्योरेंस दावों के दौरान सबूत

जब कोई एक्सीडेंट होता है, तो असली कहानी समझना कई बार मुश्किल हो जाता है. ऐसे में डैशकैम बहुत काम आता है. क्योंकि यह पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लेता है और साफ दिखाता है कि हादसा कैसे हुआ. खासकर इसलिए भी यह जरूरी है क्योंकि आजकल कुछ लोग जानबूझकर छोटी-मोटी टक्कर करके बाद में पैसे का झूठा दावा करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में डैशकैम की फुटेज सच सामने लाने में सबसे बड़ा सबूत बन जाती है.

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By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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