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झारखंड के महानायकों की संघर्ष गाथा को स्कूल एवं कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाये, बोले सुदेश महतो

Updated at : 25 Apr 2023 11:36 PM (IST)
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झारखंड के महानायकों की संघर्ष गाथा को स्कूल एवं कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाये, बोले सुदेश महतो

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने भूमिज विद्रोह के महानायक गंगा नारायण सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि झारखंड के महानायकों की संघर्ष गाथा को स्कूलों एवं कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया जाना चाहिए.

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सरायकेला/चांडिल, शचिंद्र कुमार दाश : भूमिज विद्रोह के महानायक गंगा नारायण सिंह की जयंती पर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सह पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो ने मंगलवार को ईचागढ़ के नीमडीह में भूमिज आंदोलन के महानायक क्रांतिवीर गंगा नारायण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शहीदों की संघर्ष गाथा धरती पुत्रों को जुल्म और अन्याय से लड़ने की ताकत देता है. साथ ही अतीत में पुरखों के संघर्ष की याद भी दिलाता है. झारखंड के सभी महानायकों की संघर्ष गाथा को स्कूलों एवं कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया जाना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी वीर लड़ाकों की शहादत से वाकिफ हो सके. स्वतंत्रता की लड़ाई में झारखंड के वीर सपूतों की भूमिका अतुलनीय है. झारखंड की धरती ने ऐसे-ऐसे महान शौर्य और पराक्रमी पुत्रों को जन्म दिया है, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन अपने लहू से सींचा है.

शहीदों के संघर्ष तथा झारखंड गठन के उद्देश्य को समझने की जरूरत

आजसू सुप्रीमो ने कहा कि जिन क्रांतिकारियों, वीर सपूतों को सामने रखकर झारखंड का गठन किया गया, उसके पीछे के संघर्ष और उद्देश्य को समझने की जरुरत है. जिन विषयों को लेकर इतनी बड़ी शक्ति एकत्रित हुई, असंख्य कुर्बानियां दी गई, इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी हम उन्हें स्थापित कर पाए या नहीं, बड़ी आबादी के मन के सवाल सुलझा पाए या नहीं, इसका मूल्यांकन जरूरी है.

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विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, आक्रामकता एवं कुशल प्रबंधन से लड़ाई जीती जा सकती है

वीर शहीद गंगा नारायण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की माटी के लाल अमर शहीद गंगा नारायण सिंह ने सीमित संसाधनों तथा पारंपरिक हथियारों के साथ अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों से लैस सेना का सामना कर भूमिज विद्रोह का बिगुल फूंका. झारखंड के वीर सपूतों से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, आक्रामकता एवं कुशल प्रबंधन से बड़ी से बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है. इस अवसर पर जुगसलाई के पूर्व विधायक रामचंद्र सहिस, आजसू के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो, बुद्धिजीवी मंच के प्रदेश अध्यक्ष सह सरायकेला-खरसावां जिला के पूर्व डीडीसी डोमन सिंह मुंडा, जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर, वेदनाथ महतो, लालमोहन गोराई, कंचन सिंह आदि उपस्थित थे.

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