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Sawan Somwar 2021: आज है सावन मास की दूसरी सोमवारी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, आरती और पूजन सामग्री

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Sawan Somvar Vrat Puja Vidhi, Katha, Muhurat, aarti And Significance: श्रावण मास का महीना शुरू हो चुका है. कल इस महीने का दूसरा सोमवार है. सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. क्योंकि सावन और सोमवार दोनों ही भगवान शिव की पूजा के लिए खास होते है. जानिए जानते है इस व्रत से जुड़ी पूरी डिटेल्स

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 जानें पूजा सामग्री

सावन मास की सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए फूल, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री शामिल करें.

चौघड़िया

प्रातः:06:00 से 07:30 अमृत

प्रात:07:30 से 09:00 तक काल

प्रातः 09.00 से 10.30 तक शुभ

प्रातः10:30 से 12:00 रोग

दोपहरः 01.30 से 03.00 तक उद्वेग

शामः 03.00 से 04.30 तक चर

शामः 04.30 से 06.00 तक लाभ

ये बरतें सावधानियां

शिवजी की पूजा करते समय कुछ सावधानियों को बरतना जरूरी होता है. शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज हो जाते हैं. इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए.

इस दिन जल्दी उठकर स्नान करें.

मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें.

माता पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं.

पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें.

शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं.

प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं.

धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें.

आखिर में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद बांटें.

भगवान शिव की आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

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जानें सावन सोमवार का महत्व

सोमवार का दिन चन्द्र ग्रह का दिन होता है और चन्द्रमा के नियंत्रक भगवान शिव हैं. इस दिन पूजा करने से न केवल चन्द्रमा बल्कि भगवान शिव की कृपा भी मिल जाती है. कोई भी व्यक्ति जिसको स्वास्थ्य की समस्या हो, विवाह की मुश्किल हो या दरिद्रता छायी हो, अगर सावन के हर सोमवार को विधि पूर्वक भगवान शिव की आराधना करता है तो तमाम समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है.

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