दो लोगों को जिंदगी देकर दुनिया से विदा हुए साहिबगंज के रायला सोरेन

Updated at : 07 Feb 2024 4:54 AM (IST)
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दो लोगों को जिंदगी देकर दुनिया से विदा हुए साहिबगंज के रायला सोरेन

स्टेट आर्गन टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन, (सोट्टो) गोवा ने झारखंड के संगठन से संपर्क कर बरहेट में रहने वाले रायला के परिवारवालों को गंभीर स्थिति के बारे में सूचना दी. रायला के परिवार की बोलचाल की भाषा संथाली है.

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बरहेट : साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड के पंचकठिया के रक्सी गांव निवासी 40 वर्षीय रायला सोरेन ने जिंदगी को अलविदा कहते-कहते अंगदान कर गोवा में दो लोगों को नया जीवन दे दिया. करीब पांच महीने पहले वह गोवा में टैक्सी चलाने के लिए गये थे. एक सड़क दुर्घटना में गिरने के बाद रायला के सिर में गंभीर चोट लगी थी. उन्हें गोवा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में भर्ती कराया गया. गोवा मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी, इंटेसिव केयर और आंतरिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों के पैनल ने चार फरवरी को रायला को ब्रेन डेड घोषित कर दिया.

इसके बाद स्टेट आर्गन टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन, (सोट्टो) गोवा ने झारखंड के संगठन से संपर्क कर बरहेट में रहने वाले रायला के परिवारवालों को गंभीर स्थिति के बारे में सूचना दी. रायला के परिवार की बोलचाल की भाषा संथाली है. इस वजह से उन्हें सूचना देने में परेशानी हो रही थी. इसके बाद अनुवादक की मदद से उसके परिवार को सूचित किया गया. सोट्टो गोवा, सोट्टो झारखंड व अन्य स्थानीय समूहों के समन्वय से परिवार के सदस्यों के लिए गोवा जाने की व्यवस्था की गयी. गोवा पहुंचने के बाद सोट्टो गोवा की टीम ने रिश्तेदारों को परामर्श दिया और जीवन रक्षक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के विकल्प के रूप में अंगदान के विषय में परिवार को सलाह दी. अंगदान के लिए रायला के भाई ने सहमति दी.

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रायला की दोनों किडनियां सुरक्षित थीं

चिकित्सीय कारणों की वजह से रायला के दोनों किडनी प्रत्यारोपण के लिये उपयुक्त थे. सोट्टो गोवा के ‘नवे जीवित -न्यू लाइफ’ के चिकित्सा मानदंडों के आधार पर प्रतीक्षा सूची में प्राथमिकता रैंकिंग के अनुसार दोनों किडनी आवंटित की गयी. इसमें गोवा मेडिकल कॉलेज में अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में दो रोगियों में प्रत्यारोपित किया गया. इनमें एक 26 व दूसरे 36 वर्षीय मरीज हैं, जिन्हें किडनी प्राप्त हुआ और नया जीवन मिला. वहीं, रायला अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चे एक बेटी (15 वर्ष) और दो बेटे (12 और 10 वर्ष) छोड़ गये हैं. रायला के परिवार के प्रति कृतज्ञता दिखाते हुए गोवा मेडिकल कॉलेज के डीन ने अंगदाता के पार्थिव शरीर को उनके परिवार के सदस्यों के साथ गोवा से झारखंड में उनके गांव तक ले जाने की पूरी व्यवस्था की. रायला का शव बुधवार तक बरहेट पहुंचने की संभावना है.

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