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भारत ने तोड़ा पाकिस्तान का रिकॉर्ड, अब गोरखपुर में दुनिया का सबसे ऊंचा खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर

Updated at : 07 Dec 2021 2:26 PM (IST)
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भारत ने तोड़ा पाकिस्तान का रिकॉर्ड, अब गोरखपुर में दुनिया का सबसे ऊंचा खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर

गोरखपुर का उर्वरक कारखाना एक बार फिर नए सिरे से शुरू हो गया है. इस कारखाने का प्रिलिंग टॉवर दुनियाभर में सबसे ऊंचा है. इससे पहले पाकिस्तान के दहरकी शहर में स्थित खाद कारखाने के प्रिलिंग टॉवर के नाम ये उपलब्धि थी, जोकि अब भारत के नाम हो चुकी है.

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Gorakhpur News: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज, 7 दिसंबर को गोरखपुर में एक साथ तीन बड़ी योजनाओं का लोकार्पण किया. प्रधानमंत्री ने यहां खाद कारखाना, एम्स और वायरोलॉजी के रूप में स्थापित 9 लैब का उदघाटन किया है. पीएम ने यहां कुल 9,600 करोड़ रुपए से अधिक मूल्‍य की विकास परियोजनाएं राष्‍ट्र को समर्पित की हैं.

जर्जर कारखाने में डाली जान

बता दें कि गोरखपुर का उर्वरक कारखाना 10 जून 1990 में बंद हो गया था और 1990 से लेकर 2014 तक यानी 24 वर्षों तक यह कारखाना बंद रहा. ऐसे में एक बार फिर मोदी सरकार ने इस कारखाने में नए सिरे से जान डालने का काम किया है. 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में इसका शिलान्यास किया. यह कारखाना पहले के कारखाने की तुलना में 4 गुना बड़ा है.

पाकिस्तान का टूटा रिकॉर्ड

आइए बात करते हैं, इस कारखाने की खासियत के बारे में. गोरखपुर स्थित खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर दुनियाभर में सबसे ऊंचा है. इससे पहले पाकिस्तान के दहरकी शहर में स्थित खाद एग्रो फर्टिलाइजर्स लिमिटेड का प्रिलिंग टॉवर सबसे ऊंचा था, जिसकी ऊंचाई 125 मीटर थी, लेकिन अब हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड द्वारा तैयार किए गए कारखाने का प्रिलिंग टॉवर सबसे ऊंचा टॉवर बन गया है. कारखाने के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी दोगुनी है.

कारखाने से नहीं होगा प्रदूषण

बता दें कि, जापानी कंपनी द्वारा तैयार टॉवर की ऊंचाई 149.5 मीटर है. इसका व्यास 28 से 29 मीटर है. आठ हजार करोड़ से अधिक लागत वाले इस कारखाने से प्रदूषण भी नहीं फैलेगा, क्योंकि यह कारखाना प्राकृतिक गैस से संचालित होगा. इस कारखाने से रोजाना 3850 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा.

प्रिलिंग टॉवर का क्या काम होता है

दरअसल, यूरिया उत्पादन के दौरान कारखाने के प्रिलिंग टॉवर से खाद के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले तरल पदार्थ को दूसरे यूनिट से पाइपलाइन के जरिए नीचे गिराया जाता है. टॉवर से नीचे आते आते संबंधित पदार्थ यूरिया में तब्दील हो जाता है.

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