Prayagraj Magh Mela 2021: आज 37 साल बाद इस योग में माघ मेला का पहला स्नान करेंगे श्रद्धालु, जानें क्या है Shubh Muhurat और मान्यताएं…
Prayagraj Magh Mela 2021: कोरोना वायरस संक्रमण काल में संगम किनारे बसाए गए माघ मेले का पहला स्नान पर्व मकर संक्रांति पर गुरुवार को होगा. इसमें लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाएंगे. इस बार मेले में हर श्रद्धालु को अपनी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट लानी होगी. घाटों पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ स्नान की व्यवस्था की गई है. इस बार ग्रहों और नक्षत्रों का विशेष संयोग मकर संक्रांति और मेले को ख़ासा फलदायक बना रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी अमले पर श्रद्धालुओं को कोरोना के संक्रमण से बचाने की बड़ी चुनौती भी है. मेले में इस बार छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे.
आज संगम पर पवित्र स्नान करेंगे भक्त
पौष पूर्णिमा के अवसर पर भक्त संगम, यमुना, गंगा और पौराणिक सरस्वती के संगम पर पवित्र स्नान करेंगे. माघ मेला के पूरे महीने के दौरान तीर्थयात्री संगम के तट पर रहते हैं और सुबह जल्दी स्नान करते हैं और अन्य धार्मिक कर्तव्यों में भाग लेते हैं
मकर संक्रांति पर होता है पुण्य काल का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर पुण्य काल का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि पुण्य काल में पूजा और दान करने से मकर संक्रांति का पूर्ण लाभ मिलता है. मकर संक्रांति आज भगवान सूर्य सुबह 8 बजकर 20 मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे. पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल सूर्यास्त तक बना रहेगा.
इस दिन क्यों बनाई जाती है खिचड़ी
मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के दौरान नाथ योगियों के पास खाने के लिए कुछ नहीं था. तब बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और हरी सब्जियों को एक साथ पकाने की सलाह दी थी. इस दिन से खिचड़ी खाने और बनाने का रिवाज चला आ रहा है. खिचड़ी को पौष्टिक आहार के रूप में भी ग्रहण किया जाता है.
इस बार पंडाल लगाने की अनुमति नहीं
इस बार माघ मेला में पंडाल लगाने की अनुमति नहीं है. सिर्फ आश्रमों या कल्पवास के लिए पंडाल लगाया गया है.
सूर्यदेव को इस सामग्री से करें पूजा
सूर्यदेव को जल, लाल फूल, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, अक्षत, सुपारी और दक्षिणा अर्पित की जाती है. पूजा के उपरांत लोग अपनी इच्छा से दान-दक्षिणा करते हैं. वहीं, इस दिन खिचड़ी का दान करना भी विशेष महत्व रखता है.
37 साल बाद इस योग में स्नान करेंगे श्रद्धालु
दान-पुण्य और स्नान का पर्व मकर संक्रांति है. इस बार मकर संक्राति पर पंचग्रही योग बना है. ज्योतिष के अनुसार यह योग 37 साल बाद बना है. श्रद्धालु 37 साल बाद इस योग में पुण्य की डुबकी लगाएंगे. आज श्रद्धालु घाट किनारे स्नान कर पूजा-अर्चना, अंजलि से ही सूर्य को अर्घ्य देंगे. इसके बाद गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाएंगे और यथाशक्ति दान-दक्षिणा देंगे. वहीं, खिचड़ी के साथ ही पूछ पकड़कर गोदान भी करेंगे.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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