मुख्तार अंसारी का गैंग देश का सबसे खूंखार गिरोह, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जानें किस बात पर की ये तल्ख टिप्पणी...

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्तार अंसारी गैंग को देश का सबसे खूंखार आपराधिक गिरोह करार दिया है. कोर्ट ने हत्या के एक मामले में मुख्तार गैंग के सदस्य की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्तार गैंग का सक्रिय सदस्य रामू मल्लाह भी स्वयं में खूंखार अपराधी है.
Prayagraj: माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी और बहू निखत के ‘जेलकांड’ को लेकर होली के बाद जांच में तेजी देखने को मिल रही है. अभी तक की पड़ताल में मुख्तार के रसूख के आगे कैसे चित्रकूट जेल में नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाइ गई, इसकी परतें एक के बाद एक खुलती जा रही हैं. इस बीच कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि मुख्तार अंसारी सबसे खूंखार गैंग का सरगना है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्तार अंसारी गैंग को देश का सबसे खूंखार आपराधिक गिरोह करार दिया है. कोर्ट ने हत्या के एक मामले में मुख्तार गैंग के सदस्य की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्तार गैंग का सक्रिय सदस्य रामू मल्लाह भी स्वयं में खूंखार अपराधी है. ये हत्या, षड्यंत्र जैसे जघन्य अपराधों के ट्रायल झेल रहा है. इसका आपराधिक इतिहास है. फर्जी वोटर कार्ड, ग्राम प्रधान का फर्जी पता देकर ट्रायल से भाग रहा था. कोर्ट को धोखा दे रहा था.
हाई कोर्ट ने कहा कि रामू मल्लाह गैर जमानती वारंट व कुर्की कार्रवाई के बावजूद फरार रहा और कोर्ट से इस बात की दलील देकर जमानत मांग रहा कि अधिकांश मामलों में वह बरी हो चुका है. न्यायमूर्ति डी के सिंह ने यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी कि जेल से बाहर आते ही गवाहों को प्रभावित करेगा और निष्पक्ष व निर्भीक ट्रायल संभव नहीं हो सकेगा.
हाई कोर्ट ने कहा इन लोगों का इतना भय है कि कोई गवाही देने का साहस नहीं करता या गवाह पक्षद्रोही हो जाते हैं. ये लोग गवाह को या तो मिला लेते हैं या मार देते हैं, जिसके चलते दुर्दांत अपराधी बरी हो जाते हैं.
हाई कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष, निर्भीक व सही आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए गवाहों का निर्भीक, निष्पक्ष होना जरूरी है. तभी निष्पक्ष ट्रायल व कानून का शासन कायम रह सकता है. राज्य यदि गवाहों के जीवन संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकती तो अपराध बढ़ेगा, गवाह पक्षद्रोही होंगे और अपराधी बरी होते रहेंगे. ऐसे अपराधियों का जेल में रहना न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है.
हाई कोर्ट ने रामू मल्लाह को पहले मिली जमानत पर भी हैरानी जताई. कोर्ट ने कहा कि यह अजीब बात है कि इसी हाई कोर्ट की एक को-ऑर्डिनेट बेंच ने 2013 में रामू को जमानत पर रिहा कर दिया था. रामू न केवल मुकदमे के दौरान फरार हो गया बल्कि जमानत आवेदन पर गलत पता देकर कोर्ट के साथ धोखाधड़ी भी की गई. यही नहीं ग्राम प्रधान का जाली प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया गया.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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