Coronavirus Lockdown : हरियाणा से पैदल चलकर 17 मजदूर जा रहे थे मुजफ्फरपुर, पहुंच गये रोहतास

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन का एलान किया है. जिसके बाद दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए अपने घर जाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं. रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रहे हजारों की संख्या में मजदूर लॉकडाउन के एलान के बाद से ही अपने घरों के निकलने लगे है.
रोहतास : कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन का एलान किया है. जिसके बाद दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए अपने घर जाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं. रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रहे हजारों की संख्या में मजदूर लॉकडाउन के एलान के बाद से ही अपने घरों के निकलने लगे है. जब कोई वाहन नहीं मिला रहा है तो पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय करने का प्रयास उनके लिए कई बार मुसीबत बन रहा है. इसी कड़ी में हरियाणा से बिहार में अपने गांव मुजफ्फरपुर के औराई थाना के मेहसउथा एवं सीतामढ़ी पैदल ही जा रहे 17 मजदूर शनिवार को नोखा पहुंचे.
नोखा पहुंचे मजदूर बिंदे साह, बच्चे साह, शिबू साह, ललन साह, प्रिंस कुमार ने बताया कि हरियाणा से आने के दौरान रास्ते में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. परंतु यूपी में कई जगह उन्हें प्रशासन की मदद भी मिली. हालांकि, गाड़ी की व्यवस्था कोई नहीं करा सके.
हरियाणा के पलवल जिला अंतर्गत होडल स्थित एक नमकीन फैक्टरी में मजदूरी करने वाले सत्रह मजदूर लॉकडाउन के बाद 23 मार्च को पैदल ही गांव के लिए चल दिये. मजदूरों ने बताया कि वे कई वर्षों से वहां फैक्टरी में काम करते आ रहे हैं. लेकिन, लॉकडाउन के बाद फैक्टरी बंद होने की घोषणा होते ही उनके सामने वहां रहने का कोई वजह समझ में नहीं आ रहा था. इस बीच ट्रेन भी बंद हो गयी, जिससे भारी समस्या उत्पन्न हो गयी और वे लोग पैदल ही बिहार स्थित अपने गांव के लिए निकल गये.
हरियाणा-दिल्ली से मुजफ्फरपुर के लिए लगभग बारह सौ किमी के सफर पर पैदल निकल पड़े मजदूरों ने बताया कि 23 मार्च को उनके फैक्टरी मालिक ने उन्हें पैसे देकर दिल्ली तक पहुंचा दिया. फिर दिल्ली से आगरा की 233 किमी का सफर वे दो दिनों में तय कर आगरा पहुंचे. आगरा से 30 किमी पैदल चलकर वे टूंडला पहुंचे जहां से एक ट्रक वाले ने उन्हें इटावा तक छोड़ दिया. इसके बाद सभी इटावा से कानपुर पैदल चलकर पहुंचे. फिर कानपुर से सासाराम ट्रक द्वारा पहुंचे. जहां प्रखंड मुख्यालय पर बाहर से आये 17 मजदूरों के पहुंचने की खबर प्रशासन को दी गयी.
एसडीओ राजकुमार गुप्ता, बीडीओ रामजी पासवान एवं इओ सुशील कुमार प्रखंड मुख्यालय पहुंचे. इसके बाद काली मंदिर धर्मशाला स्थित आश्रय स्थल पर मजदूरों को खाना खिलाया गया एवं पीएचसी के डॉ. संदीप कुमार के नेतृत्व में मेडिकल टीम के द्वारा उनकी जांच की गयी. डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि सभी मजदूर स्वस्थ हैं, परन्तु बाहर से आये हैं इसलिए उनको 14 दिनों के होम कोरेंटाईन पर रहने की सलाह दी गयी है.
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लेखक के बारे में
By Samir Kumar
More than 15 years of professional experience in the field of media industry after M.A. in Journalism From MCRPV Noida in 2005
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