ePaper

Laddu Gopal ki Chatti 2021: आज मनेगी लड्डू गोपाल की छठी, जानें कान्हा की छठी मनाने का सही तरीका

Updated at : 04 Sep 2021 8:58 AM (IST)
विज्ञापन
Laddu Gopal ki Chatti 2021: आज मनेगी लड्डू गोपाल की छठी, जानें कान्हा की छठी मनाने का सही तरीका

जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हो चुका है. अब छह दिन के बाद श्री कृष्ण की छठी मनाई जाएगी. इस साल 4 सितंबर दिन शनिवार को लड्डू गोपाल की छठी पर्व मनाया जाएगा.

विज्ञापन

Laddu Gopal ki Chatti 2021: जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हो चुका है. अब छह दिन के बाद श्री कृष्ण की छठी मनाई जाएगी. इस साल 4 सितंबर दिन शनिवार को लड्डू गोपाल की छठी पर्व मनाया जाएगा. श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को लड्डू गोपाल कहा जाता हैं. इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना की जाती है.

इस दिन लोग कढ़ी-चावल बनाते हैं. लड्डू गोपाल को स्नान करवा के पीले रंग के वस्त्र पहनाते हैं और माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं. इस दिन भगवान का नाम करण भी किया जाता है. श्री कृष्ण को लड्डू गोपाल, ठाकुर जी, कान्हा, माधव, नंदलाला, देवकीनंदन भी कहते हैं. छठी वाले दिन इनमें से कोई भी एक नाम लड्डू गोपाल का रख दिया जाता है

लड्डू गोपाल की छठी मनाने का सही तरीका

जन्माष्टमी के छह दिन बाद कन्हैया की छठी मनाई जाती है. जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को अपने घर में रखते है. छठी के दिन सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहन कर कान्हा को पंचामृत से स्नान करवाएं. इसके बाद पंचामृत बनाने के लिए दूध, घी, शहद और गंगाजल को मिलाकर पंचामृत बना लें. फिर शंख में गंगाजल भरकर एक बार फिर से कान्हा को स्नान करवाएं. इसके बाद उन्हें पीले रंग के वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें. लड्डू गोपाल को पीला रंग अधिक प्रिय है, इसलिए कोशिश करें कि उन्हें पीले रंग के वस्त्र ही पहनाएं.

इसके बाद कान्हा जी को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और उनका नाम करण करें. ऊपर बताए नामों में से कोई भी नाम चुन कर उन्हें उसी नाम से पुकारें. कान्हा के चरणों में घर की चाबी सौंप दें. इसके बाद लड्डू गोपाल की कथा करें. ऐसा करने से नंदलाला की कृपा हमेशा आप पर बनी रहेगी. इस दिन घर में कढ़ी-चावल जरूर बनाएं.

क्यों मनाते हैं छठी

श्री कृष्ण का जन्म कारगार में हुआ था और उन्हें वासुदेव ने रातों-रात की यशोदा के घर छोड़ दिया था. कंस को जब ये बात पता लगती है तो वे पूतना को श्री कृष्ण को मारने के लिए गोकुल यशोदा के पास भेजता है. और ये आदेश देता है कि गोकुल में जितने भी 6 दिन के बच्चे हैं उन्हें मार दिया जाए. पूतना के गोकुल पहुंचते ही यशोदा बालकृष्ण को छिपा देती हैं. श्री कृष्ण को पैदा हुए छह दिन हो गए थे, लेकिन उनकी छठी नहीं हो पाई थी. तब तक उनका नामकरण भी नहीं हो पाया था. इसके बाद यशोदा ने 364 दिन बाद सप्तमी को छठी पूजन किया और तभी से श्री कृष्ण की छठी मनाई जाने लगी. इतना ही नहीं, तभी से बच्चों की भी छठी की परंपरा शुरू हो गई.

Posted By: Shaurya Punj

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola