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Kharmas 2023: इस दिन से लगने वाला है खरमास, अगले एक महीने तक भूलकर भी ना करें ये सारे काम

Updated at : 14 Mar 2023 12:07 PM (IST)
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Kharmas 2023: इस दिन से लगने वाला है खरमास, अगले एक महीने तक भूलकर भी ना करें ये सारे काम

Kharmas 2023 does and donts: मार्च में 16 तारीख से खरमास लगने के लिए कारण शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाएगी. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में किसी भी तरह का कोई मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश या किसी भी तरह का कोई संस्कार नहीं किए जाने का विधान बताया गया है.

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Kharmas 2023 does and donts: हर साल में दो बार खरमास लगते हैं. सूर्य देवता देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तब-तब खरमास लगता है. इस सास खरमास 16 मार्च 2023 से शुरू हो रहा हैं. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में किसी भी तरह का कोई मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश या किसी भी तरह का कोई संस्कार नहीं किए जाने का विधान बताया गया है.

19 अप्रैल की रात को हो जाएगी खरमास की समाप्ति

खरमास की यह अवधि इस साल 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी. इसके अगले दिन यानी 20 अप्रैल से गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, यज्ञ समेत अन्य मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे.

खरमास में इन कार्यों को करने की होती है मनाही

  • खरमास के दौरान कभी भी मुंडन आदि संस्कार नहीं करना चाहिए.

  • इसके अलावा खरमास के महीने में विवाह आदि मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए. इस वर्ष 14 अप्रैल को जब मलमास समाप्त होगा तब दोबारा शादी विवाह, मुंडन आदि किए जा सकेंगे. इस वर्ष विवाह मुहूर्त की बात करें तो अप्रैल में 24, 25, 26, 27 और 30 अप्रैल को विवाह मुहूर्त है.

  • खरमास में बहू बेटियों की विदाई नहीं करनी चाहिए.

  • इस दौरान गृह प्रवेश भी नहीं किया जाता है.

  • किसी भी तरह का कोई शुभ या नया काम भी मलमास के महीने में लोग शुरू करने से कतराते हैं.

  • मुमकिन हो तो खरमास के इस महीने में गेहूं, चावल, मूंग की दाल, जौ, तिल, आम, जीरा, सुपारी, सौंठ, सेंधा नमक भी नहीं खाना चाहिए.

  • खरमास के महीने में किसी से भी गलत तरह से बात करने, लड़ाई झगड़ा या विवाद करने से भी जितना हो सके बचना चाहिए.

खरमास में क्या करें

खरमास के महीने में सूर्य उपासना करना बेहद शुभ साबित होता है. इस दौरान आप चाहें तो रोजाना आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं और साथ ही इस दौरान विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी विशेष फलदाई होता है. इसके अलावा इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य करने से अक्सर लोग बचते हैं. इसके पीछे की वजह बताई जाती है कि, इस दौरान किया गया कोई भी काम शुभ नहीं होता है और बीच में अटक जाता है और धन हानि भी हो सकती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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