झारखंड पंचायत चुनाव: 1676 प्रत्याशी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव, राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 साल के लिए लगाई रोक

Jharkhand Panchayat Chunav 2022: गढ़वा जिले में वर्ष 2015 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्य के 25, मुखिया के 189, वार्ड पार्षद के 2448 तथा पंचायत समिति सदस्य के 245 पद के लिए चुनाव हुए थे.
Jharkhand Panchayat Chunav 2022: वर्ष 2015 में गढ़वा जिले में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के 1676 प्रत्याशी इस बार चुनाव नहीं लड़ पायेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने इन प्रत्याशियों के झारखंड पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है. आय-व्यय का ब्योरा जमा नहीं करने की वजह से उनको 3 साल के लिए चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है. राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश के मुताबिक चुनाव के दौरान खर्च की गयी राशि का ब्योरा जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन वर्ष 2015 का चुनाव लड़ने एवं जीतनेवाले प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 2667 प्रत्याशियों ने चुनाव खर्च जमा नहीं किया था. सभी को नियमानुसार तीन बार नोटिस भेजा गया था. अंतिम नोटिस प्राप्त होने के बाद करीब 1000 प्रत्याशियों ने आय- व्यय का खर्च जमा कर दिया, जबकि शेष बचे 1676 प्रत्याशियों ने ब्योरा जमा नहीं किया था.
तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक
वर्ष 2015 में कुल 2676 प्रत्याशियों में से 1676 प्रत्याशियों ने अपना आय- व्यय का ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को नहीं दिया है. इसलिये उन्हें 3 साल के लिए चुनाव लड़ने से पर रोक दिया गया है. इस वजह से ये पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं ले पायेंगे. जिन लोगों पर रोक लगायी गयी है कि उनमें 243 मुखिया प्रत्याशी, 291 पंचायत समिति सदस्य प्रत्याशी तथा 1142 वार्ड पार्षद के प्रत्याशी शामिल हैं. इसमें खरौंधी में 23, भवनाथपुर में 192, कांडी में एक, बरडीहा में एक, मझिआंव में 27, रमना में 272, सगमा में 81, धुरकी में 101, डंडई में 154, चिनियां में 138, मेराल में 218, गढ़वा में 287, डंडा में 29, रंका में 29, रमकंडा में नौ, भंडरिया में 93 व बड़गड़ में 21 प्रत्याशी शामिल हैं.
आय-व्यय का ब्योरा देना अनिवार्य
आपको बता दें कि गढ़वा जिले में वर्ष 2015 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्य के 25, मुखिया के 189, वार्ड पार्षद के 2448 तथा पंचायत समिति सदस्य के 245 पद के लिए चुनाव हुए थे. इस चुनाव में करीब 10 हजार प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था. सभी प्रत्याशियों को नियमानुसार चुनाव के दौरान हुये आय और खर्च का डिटेल्स कागजात के साथ राज्य निर्वाचन आयोग में जमा करना था.
रिपोर्ट: पीयूष तिवारी
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