गढ़वा में बिना PT टीचर के कैसे पूरा होगा मिशन ओलंपिक का सपना, जानें जिले में क्या है स्थिति

Jharkhand News, Garhwa News : नयी शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा को जोड़ने के पीछे का उद्देश्य ओलंपिक गेम्स के लिए ग्रामीण एवं विद्यालय स्तर से खिलाड़ियों को उभार कर निकालना भी है, लेकिन गढ़वा जिले में शारीरिक शिक्षकों (पीटी टीचर) के पद बड़े पैमाने पर खाली पड़े हुए हैं.
Jharkhand News, Garhwa News, गढ़वा (पीयूष तिवारी) : केंद्र सरकार द्वारा लाये गये नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National education policy- NEP) में खेलकूद के साथ शारीरिक शिक्षा (Physical education) को जोड़ दिया गया है़ इस शिक्षा नीति में सभी प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय, उच्च विद्यालयों एवं कस्तूरबा विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा की कम से कम एक घंटी को अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि प्लस टू में विद्यार्थी इसे वैकल्पिक विषय के रूप रख सकते हैं.
नयी शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा को जोड़ने के पीछे का उद्देश्य ओलंपिक गेम्स के लिए ग्रामीण एवं विद्यालय स्तर से खिलाड़ियों को उभार कर निकालना भी है, लेकिन गढ़वा जिले में शारीरिक शिक्षकों (पीटी टीचर) के पद बड़े पैमाने पर खाली पड़े हुए हैं.
गढ़वा जिले में सभी कोटी के विद्यालयों की संख्या 1434 है, लेकिन इसके खिलाफ यहां मात्र 44 PT टीचर ही सेवारत हैं. इस वजह से इस शिक्षा नीति गढ़वा जिले में लागू नहीं हो पा रही है. जिले के 126 उच्च विद्यालय (प्लस टू सहित) एवं 14 कस्तूरबा विद्यालयों को छोड़ दिया जाये, तो प्राथमिक विद्यालय एवं मध्य विद्यालय में पिछले 21 सालों से PT टीचर्स की बहाली नहीं ली गयी है, जबकि उच्च विद्यालयों में साल 2016 में सिर्फ एक बार PT टीचर की बहाली ली गयी है.
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जिले के उच्च विद्यालयों (प्लस टू को मिलाकर) में वर्तमान में 126 के बनिस्पत मात्र 35 PT टीचर बहाल हैं, जबकि 14 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में 8 PT टीचर सेवारत हैं, लेकिन जिले के करीब 1300 प्रावि व मवि को मिलाकर मात्र एक PT टीचर सेवारत हैं. इस वजह से इन विद्यालयों में खेलकूद व शारीरिक शिक्षा की घंटी नहीं ली जा पा रही है. कुछ विद्यालयों में दूसरे विषय के ही शिक्षक इसकी घंटी लेने के लिए कुछ समय निकालते हैं, लेकिन विद्यालयों में इसे नियमित शामिल नहीं किया जा पा रहा है.
एक तरफ जहां विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक के पद खाली पड़े हुए हैं. वहीं, दूसरी ओर गढ़वा जिले में करीब 1000 BPED (दो वर्षीय कोर्स) की शिक्षा ग्रहण कर अभ्यर्थी बेरोजगार बैठे हुए हैं. नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से उनके अंदर यह आशा जगी थी कि सरकार बहाली निकालेगी और उन्हें बहाल कर देगी, लेकिन अभी तक बहाली की दिशा में कोई पहल शुरू नहीं की गयी है. कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा भी समाप्त होनेवाली है. ऐसे में उनके अंदर सरकार के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है.
इस संबंध में गढ़वा जिले के शारीरिक शिक्षक प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के अध्यक्ष सुबोध पाठक ने कहा कि पूरे राज्य में 35 हजार शारीरिक शिक्षकों की आवश्यकता है. इसके लिए राज्य सरकारी की ओर से एक कमेटी भी गठित की गयी थी. गठित कमेटी ने अपनी बहाली से संबंधित अपनी अनुशंसा रिपोर्ट सचिव को सौंप दी है, लेकिन फिर भी बहाली प्रकिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है.
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इस संबंध में जिला खेल पदाधिकारी तूफान कुमार पोद्दार ने बताया कि विद्यालयों में खेल शिक्षकों की कमी है. इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलकर दूसरे विषय के शिक्षक जो इस विषय में भी रुचि रखते हैं, उन्हें प्रतिदिन एक घंटी के लिए निर्देशित कराया जायेगा. उन्होंने बताया कि इसके अलावे गढ़वा जिले में डेबोडिंग सेंटर भी संचालित हैं, वहां भी बच्चे खेल की बारीकियों को सीख सकते हैं.
Posted By : Samir Ranjan.
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