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ओड़िया भाषियों की समस्या को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

Updated at : 01 Oct 2021 8:37 PM (IST)
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ओड़िया भाषियों की समस्या को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओड़िया भाषी लोगों के हितों का ख्याल रखने समेत अन्य समस्या के समाधान को लेकर सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में निहित मूल्यों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह भी किया गया है.

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Jharkhand News (शचिंद्र कुमार दाश, सरायकेला) : झारखंड के ओड़िया भाषियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. श्री प्रधान ने मुख्यमंत्री से ओड़िशा और झारखंड के साझा इतिहास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में निहित मूल्यों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है. पत्र में ओड़िया भाषी लोगों के हितों का ख्याल रखते हुए इसमें हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

पत्र में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि हाल के वर्षों में ओड़िया भाषी स्कूलों और उसे मिलने वाली सुविधाओं में कमी आयी है. ओड़िया माध्यम स्कूलों में रिटायर हुए शिक्षकों के स्थान पर हिंदी भाषी शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है. NCERT ने झारखंड स्टेट अथॉरिटी (Jharkhand State Authority) को ओड़िया भाषी पुस्तकें प्रकाशित करने का कॉपीराइट दे रखा है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा.

झारखंड का शिक्षा विभाग ओड़िया माध्यम के स्कूलों को हिंदी माध्यम के स्कूलों के साथ मर्ज किया जा रहा है, ऐसा ओड़िया भाषी छात्रों और शिक्षकों की कमी का हवाला देकर किया जा रहा है. यह हमारे संविधान में उल्लेखित भाषाई विविधता और भाषाई अल्पसंख्यक के अधिकारों की भावना के पूरी तरह विपरीत है. 2006-07 से ओड़िया भाषा में सभी विषयों के टेक्स्ट बुक छात्रों को मुहैया नहीं कराये जा रहे. सिर्फ ओड़िया भाषा विषय की कक्षा एक और दो की किताबें ही दी जा रही हैं.

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साथ ही कक्षा 9 से 12 तक के लिए जैक बोर्ड ने ओड़िया भाषा की किताबों को मान्यता नहीं दी है, जिससे ओड़िया भाषी बच्चे अपनी मातृभाषा को छोड़ हिंदी भाषा का विकल्प चुनने को मजबूर हो रहे हैं. ओड़िया भाषा में रिसर्च और शिक्षा के लिए सरकारी ग्रांट या फेलोशिप को लगभग पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है.

केंद्र और मेरा पूरा साथ राज्य सरकार को मिलेगा

केंद्रीय मंत्री श्री प्रधान ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में उम्मीद जताया कि नई शिक्षा नीति और ओड़िया भाषी स्कूली बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए झारखंड में ओड़िया भाषियों की इस समस्या पर ध्यान दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार और वे स्वयं राज्य सरकार की हर मदद करने को तत्पर रहेंगे. श्री प्रधान ने पत्र में कहा है कि भाषाई अल्पसंख्याकों को भारतीय संविधान की धारा 350 (बी) सुरक्षा प्रदान करता है. नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भी जहां संभव हो मातृभाषा या स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित किया जा सकता है.

सरायकेला-खरसावां जिले के ओड़िशा के साथ साझा भाषाई और सांस्कृतिक इतिहास

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि झारखंड का सरायकेला-खरसावां जिला में ओड़िशा भाषी क्षेत्र होने के साथ साथ ओड़िशा रियासत के 26 गढ़जात में शामिल रहा है. वर्तमान में झारखंड में 20 लाख ओड़िया भाषी रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर कोल्हान में रहते हैं. इसके अलावा रांची, गुमला, धनबाद, बोकारो, सिमडेगा, लोहरदगा और लातेहार जिले में भी ओड़िया भाषी रहते हैं. ओड़िया भाषियों के राज्य आंदोलन में इनका साझा इतिहास रहा है.

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क्षेत्र में प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी उत्कलमणी गोपबंधु दास के प्रभाव कारण वर्ष 1913 से 1948 के बीच सरायकेला-खरसावां सहित सिंहभूम क्षेत्र में 300 ओड़िया स्कूल खोले गये. ओड़िया भाषा का उपयोग लैंड रिकॉर्ड और स्कूली शिक्षा में किया जाता रहा है. झारखंड गठन के दौरान कहा गया है कि ओड़िया भाषी लोगों को भाषाई अल्पसंख्यक के तौर पर मान्यता मिलेगा तथा उनके अधिकारों की रक्षा करेगा. काफी संघर्ष के बाद एक सितंबर, 2011 को ओड़िया को राज्य की दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा मिला. लेकिन, अब कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है.

पिछले दिनों ओड़िया समुदाय के लोगों ने दिया था धरना

विगत 28 सितंबर को ओड़िया समुदाय के लोगों ने अपनी समस्या को लेकर जिला मुख्यालय सरायकेला में धरना प्रदर्शन किया था. साथ ही राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा था. इसके बाद यह मुहिम तेज होने लगी है.

Posted By : Samir Ranjan.

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